Shri Vishnu Chalisa in Hindi – Benefits & Lyrics

CHALISA

vishnu chalisa benefits – विष्णु चालीसा से लाभ- भगवान् विष्णु के चालीसा पाठ से मनुष्य के समस्त जन्मो के पाप नष्ट हो जातें हैं. विष्णु भगवान् सदा अपने भक्तों पर कृपा करतें हैं. भगवान् विष्णु की कृपा से मनुष्य को अपने जीवन में सफलता मिलती है. विष्णु चालीसा के पाठ से मनुष्य को भगवान् विष्णु की कृपा प्राप्ति होती है. विष्णुजी की कृपा से मनुष्य को शुख-शान्ति की प्राप्ति होती है. भगवान् विष्णु की कृपा से मनुष्य को धन-सम्पति की प्राप्ति होती है. विष्णु भगवान् की कृपा से मनुष्य को कभी रोग दोष नहीं होता है. भगवान् विष्णु की कृपा से मनुष्य इस जनम-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त करके मोक्ष को प्राप्त करता है. 8. अगर मनुष्य सम्पूर्ण भक्ति के साथ भगवान् विष्णु की आराधना करता है तो उस पर भगवान् विष्णु की विशेष कृपा रहती है.

विष्णु चालीसा (VISHNU CHALISA LYRICS)

दोहा

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय |

कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ||

चौपाई

नमो विष्णु भगवान् खरारी , कष्ट नशावन अखिल बिहारी |

प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी , त्रिभुवन फ़ैल रही उजियारी ||

सुंदर रूप मनोहर सूरत , सरल स्वभाव मोहनी मूरत |

तन पर पीताम्बर अति सोहत , बैजंती माला मन मोहत ||

शंख चक्र कर गदा बिराजे ,देखत दैत्य असुर दल भाजे |

सत्य धर्म मद लोभ न गाजे , काम क्रोध मद लोभ न छाजे ||

संत भक्त सज्जन मनरंजन , दनुज असुर दुष्टन दल गंजन |

सुख उपजाय कष्ट सब भंजन , दोष मिटाय करत जन सज्जन ||

पाप काट भव सिंधु उतारण , कष्ट नाशकर भक्त उबारण |

करत अनेक रूप प्रभु धारण , केवल आप भक्ति के कारण ||

धरणी धेनू बन तुमहिं पुकारा , तब तुम रूप राम का धारा |

भार उतार असुर दल मारा , रावण आदिक को संहारा ||

आप वाराह रूप बनाया , ह्र्र्याक्ष को मार गिराया |

धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया , चौदह रतनन को निकलाया ||

अमिलख असुरन द्वंद मचाया , रूप मोहनी आप दिखाया |

देवन को अम्रत पान कराया , असुरन को छवि से बहलाया ||

कूर्म रूप धर सिंधु मझाया , मंदराचल गिरि तुरत उठाया |

शंकर का तुम फंद छुड़ाया , भस्मासुर का रूप दिखाया ||

वेदन को जब असुर डुबाया , कर प्रवंध उन्हें ढूढ़वाया |

मोहित बनकर खलही नचाया , उसहि कर से भस्म कराया ||

असुर जलंधर अति बलदाई , शंकर से उन कीन्ह लड़ाई |

हार पार शिव सकल बनाई , कीन सती से छल खल जाई ||

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी , बतलाई सब विपत कहानी |

तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी , व्रन्दा की सब सुरति भुलानी ||

देखत तीन दनुज शैतानी , वृंदा आय तुम्हें लपटानी |

हो स्पर्श धर्म क्षति मानी , हना असुर उर शिव शैतानी ||

तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे , हिरणाकुश आदिक खल मारे |

गणिका और अजामिल तारे , बहुत भक्त भव सिंधु उतारे ||

हरहु सकल संताप हमारे , कृपा करहु हरी सिरजन हारे |

देखहूँ मै निज दरश तुम्हारे , दीन बंधु भक्तन हित कारे ||

चहत आपका सेवक दर्शन , करहुं दया अपनी मधुसूदन |

जानूं नही योग्य जब पूजन , होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ||

शीलदया संतोष सुलक्षण , विदित नही व्रतबोध विलक्षण |

करहुं आपका किस विधि पूजन , कुमित विलोक होत दुःख भीषण ||

करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण , कौन भांति मै करहुं समर्पण |

सुर मुनि करत सदा सेवकाई ,हर्षित रहत परम गति पाई ||

दीन दुखिन पर सदा सहाई , निज जन जान लेव अपनाई |

पाप दोष संताप नशाओ , भव बंधन से मुक्त कराओ ||

सुत सम्पति दे सुख उपजाओ , निज चरनन का दास बनाओ |

निगम सदा ये विनय सुनावै , पड़े सुने सों जन सुख पावै ||

।। दोहा ।।

भक्त हृदय में वास करें पूर्ण कीजिये काज ।
शंख चक्र और गदा पद्म हे विष्णु महाराज ॥

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SHREE VISHNU CHALISA LYRICS

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