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केतु महादशा हिंदी में | प्रभाव | दोष | उपाय | राहू केतु कहानी

Dharma Karma

केतु महादशा- Ketu Mahadasha

ज्योतिषियों के अनुसार विशोंतरी दशा 120 वर्ष की मानी जाती है जिसमें केतु महादशा (ketu mahadasha in hindi) सात वर्ष की होती है. यह भी कहा गया है कि केतु एक छाया ग्रह है जो स्वयं अपनी महादशा में कोई भी स्वतंत्र परिणाम कभी नहीं होते हैं kethu dosham.

Ketu ke Upay- केतु के उपाय

आइये दोस्तों जानते हैं केतु के कुछ ख़ास उपाय. How to make Ketu Happy

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कुत्ते को रोटी खिलाएं

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रतिदिन काले या काले-सफेद रंग के कुत्ते को रोटी खिलाएं. कुत्ते को रोटी खिलाने से केतु प्रसन्न होते हैं और जातक को कष्ट देना कम कर देते हैं.

करें चांदी का हाथी स्थापित

पंडितों का मानना है कि घर में पूजा वाले स्थान पर कम से कम 250 ग्राम का चांदी का बना हुआ हाथी स्थापित करें. चांदी और हाथी के होने से घर में केतु का प्रभाव कम होने लगता है.

करवाएं कानों का छेदन

विद्वानों का मत है कि जातक को अपने दोनों कान छिदवाने पड़ते हैं जिससे कम से कम 43 दिनों तक उसमें तार डालकर रखनी पड़ती है . यह भी केतु को प्रसन्न करने का एक ज्योतिषीय टोटका है.

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लगायें केसर का टीका

यह भी कहा जाता है कि नित्य मस्तक पे केसर का टीका लगाएं और केशर का दान करें तथा संक्रांति के समय छाया दान करें .

करें धार्मिक यात्रा

जातक को मंदिरों की धार्मिक यात्रा करनी चाहिए एवं मंदिरों में सिर झुकाएं तो दूसरे भाव का केतू अच्छे परिणाम देगा.

कंबल का दान अवश्य करें

ज्योतिषियों का मानना है कि अगर संतान से परेशान हैं तो मंदिर में काले और सफेद रंग वाला कंबल का दान अवश्य करें.

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करें बड़ों का सम्मान

जातक एवं जातिका को कान में सोना अवश्य पहनना चाहिए तथा बड़ों का सम्मान करना चाहिए ,  विशेषकर ससुर का सम्मान जरूर करना चाहिए जिससे केतु अधिक प्रसन्न होते हैं .

Rahu Ketu story

राहु एवं केतु एक ही राक्षस था जिसे स्वरभानु नाम से जाना जाता था. जब समुद्र मंथन किया गया तो देवताओं को किसी कारण वश राक्षसों की सहायता की आवश्यकता पड़ी और देवताओं एवं राक्षसों में ये तय हुआ कि समुद्र से जो अमृत निकलेगा उसका रसपान राक्षसों को भी कराया जाएगा. अमृत निकलने पर एक ओर देवताओं की पंक्ति थी तो दूसरी ओर राक्षसों की. विष्णु जी को ज्ञात था कि यदि राक्षस को अमृतपान करते हैं तो वे सदा के लिए अमर हो जाएंगे और फिर अत्यंत उत्पात मचाएंगे. इसी कारण से भगवान विष्णु ने मोहिनी का रुप धर लिया एवं मुस्कुराते हुए देवतागण को अमृत पिलाना प्रारंभ कर दिया और राक्षसों को अपनी मोहिनी मुस्कान से लुभाते रहे.

राक्षस स्वरभानु को तुरंत ये आभास हो गया कि राक्षसों को अमृत नहीं पिलाया जाएगा इसी कारण उसने वेष बदला और चुपके से देवताओं वाली की लाईन में जाकर बैठ गया. मोहिनी बने भगवन विष्णु जी ने राक्षस स्वरभानु के प्याले में भी अमृत डाल दिया तथा उसने प्याले को मुँह से लगाया और अमृत पीने लगा, ज्यों ही उसने अमृत पीना शुरु किया तक सूर्य एवं चंद्रमा ने पहचान लिया कि यह राक्षस स्वरभानु है. विष्णु जी ने जल्दी से अपना चक्र राक्षस स्वरभानु की ओर चला दिया लेकिन देरी हो चुकी थी. क्योंकि जब उसकी गर्दन धड़ से अलग हुई तब तक अमृत की कुछ बूँदे उसके गले से नीचे उतर चुकी थीं. अमृतपान से स्वरभानु तो अमर हो गया था परन्तु वह दो भागों में कट चुका था, एक हिस्सा उसकी गर्दन का और दूसरा हिस्सा था उसका धड़.

गर्दन से ऊपर वाला हिस्सा बना राहु और धड़ को केतु जे नाम जाना जाने लगा. तब से ये दोनों हिस्से आसमान में भटक रहे हैं. राहु को सांप का मुँह कहा जाता है और केतु को सांप की पूँछ कहा जाता है.

कहा ये भी जाता है कि सूर्य देव और चंद्रमा जी ने स्वरभानु को पहचान लिया था. इसी कारण से इन्हीं दोनों ग्रहों को ग्रहण लगता है. जिस दिन भी ग्रहण होता है उस दिन राहु/केतु अक्ष पर होते हैं और इन्हें यह ग्रसित करता है अर्थात निगलता है.

कहा तो यह भी गया है कि सूर्य का जो विस्तारित रास्ता आकाश में बना हुआ है. उस रास्ते को जब चंद्रमा का विस्तारित रास्ता दो निश्चित बिंदुओं पर काटता है तो उन बिंदुओं को राहु तथा केतु कहा जाता है. अमृत की कुछ बूंदे गले से नीचे जाने के कारण ही केतु को मोक्षकारी ग्रह भी कहा गया है.

क्योंकि राहु शरीर का ऊपरी भाग है जो देख तो रहा है परन्तु कुछ कर नहीं सकता है. केतु शरीर का दूसरा भाग है जिसे कुछ दिखाई नहीं देता तो निर्णय लेने में वह असमर्थ है. यही कारण है कि राह/केतु की दशा में व्यक्ति की बुद्धि भ्रमित सी रहती है. किसी भी कार्य में स्पष्टता दिखाई नहीं देती. सब कुछ जानते बूझते हुए भी निर्णय गलत हो जाते हैं.

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गले से नीचे के हिस्से में परेशानी

अगर केतु की महादशा चल रही हो तो व्यक्ति को गले से नीचे के हिस्सों यानि सिर के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित करता है. ऐसे व्यक्तियों को फेफड़े, पेट और पैरों की परेशानियां लगी रहती हैं और यह आलस्य की प्रवृत्ति बढ़ाता है.

मस्तिष्क हो सकता है भ्रमित

बुद्धि भ्रमित होती है अर्थात व्यक्ति किसी भी चीज के लिए सही निर्णय नहीं ले पाता. पंडितों का मानना है कि ये मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों जैसे पक्षाघात आदि का जल्दी शिकार होते हैं.

मस्तिष्क विकार हो सकते हैं उत्पन्न

ज्योतिष शास्त्र में इसे क्रूर ग्रह के नाम से जाना जाता है. यह व्यक्ति में तर्कशक्ति, बुद्धि, ज्ञान, दूरदर्शिता, जलन, ईर्ष्या, लोभ, बदले की भावना, छल-कपट जैसी भावों का कारक होता है. इसकी शुभता जहां व्यक्ति को आध्यात्मिकता की ओर झुकाव पैदा करती है.

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Benefits of Rahu Ketu Pooja-  राहु केतु पूजा के लाभ

Benefits of Rahu Pooja-  राहु पूजा के लाभ-

  • राहु गृह की पूजा ऐसी महिलाओ के लिए आवश्यक होता है जिनका कई बार गर्भपात हो गया है या गर्भधारण करने में कोई समस्या अ रही हो. राहु पूजा से शिशु का भविष्य भी सुरक्षित होता है.
  • यदि जातक घर गृह कलेश से परेशान है तो राहु पूजा के माध्यम से घर में शांति लाई जा सकती अहि .
  • राहु पूजा उन जातकों के लिए अत्यंत लाभकारी होती है है जिनकी संतान को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का आये दिन सामना करना पड़ता हो .

Benefits of Ketu Pooja-  केतु पूजा के लाभ-

  • कहा जाता है कि जीवन में अचानक घटित होने वाली वाहन दुर्घटनाओं से बचाव होता है.
  • पंडितों का मानना है कि वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, जिससे पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है.
  • ज्योतिषों के अनुसार यह माना जाता है कि घर परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और कामकाज में भी अच्छा धन-लाभ होता है.
  • यह भी स्पष्ट है कि जातक / जातिका को मानसिक शांति मिलती है, तथा स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है.

ketu in 7th house in hindi- सातवें घर में केतु

ज्योतिषियों का मानना है कि यदि जातक की जन्मकुंडली के सप्तम् भाव में केतु है तो स्त्री सुख में कमी आती है अर्थात पारिवारिक कलह के काफी योग बनते हैं. मनुष्य शीलहीन बहुत सोने वाला, हमेशा प्रवासी, यात्रा की चिंता से युक्त होता है और यह भी कहा जाता है कि सप्तम भाव में केतु होने पर जातक को अपमान का सामना करना पड़ता है. ऐसा भी देखा गया है की वह व्यभिचारिणी स्त्रियों से रति क्रिया करता है.

Rahu Ketu Remedies in Hindi at home

अगर आप को भी ऐसा महसूस होता है कि आप के ऊपर राहु-केतु से सम्बंधित समस्यें चल रही हों तो 108 बार नीचे दिए हुए बीज मंत्र का जाप करने से आपकी अधिकतर समस्यें कम या खत्म हो जाएँगी –

Rahu Mantra in Hindi

राहु का बीज मंत्र – ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

केतु का बीज मंत्र – ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

विधि – इस मन्त्रों का रहू केतु की दशा चलने तक रात्रि के समय 108 बार जाप करने से लाभ होगा .

  • इसके अलावा रुद्राक्ष (Rudraksh) धारण करने से भी राहु-केतु से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है.
  • राहु से सम्बंधित परेशानियों को दूर करने के लिए सरसों के दाने, कोई सिक्का, सतनजा अर्थात सात प्रकार के अनाज का दान करना अत्यंत लाभकारी रहता है
  • यदि आपकी कुंडली में राहु-केतु की दशा चल रही हो तो ध्यान रखें कि पूजा करते समय चंदन (Sandalwood) की धूपबत्ती या अगरबत्ती अथवा इत्र का प्रयोग करें. चंदन की खुशबू इन ग्रहों के प्रभाव को कम करने में सहायता करती है.
  • आप अपने घर में भी रूम फ्रेशनर के रूप में चंदन की खुशबू वाला रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे भी राहु-केतु का प्रभाव काफी हद तक कम होता है.
  • जगतजननी माता दुर्गा को छायारूपेण भी कहा जाता है. राहु-केतु छाया ग्रह हैं इसलिए राहु-केतु की शांति से सम्बंधित उपाय के लिए माता दुर्गा (Goddess Durga) की पूजा करना लाभकारी रहता है.
  • जातक को चाहिए कि नाग पर नाचते हुए भगवान कृष्ण की मूर्ती या तस्वीर सामने रखकर ओम नम: भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करे.
  • इसके अतिरिक्त राहु भगवान शिव (Lord Shiv) की आराधना करते हैं इसी कारण जब राहु-केतु ग्रह से सम्बंधित  कोई दिक्कत आये तो व्यक्ति को भगवन भोलेनाथ की शरण में जाना चाहिए और उन्हीं की पूजा करनी चाहिए.
  • रहू केतु की दशा की स्थिति में जातक को सोमवार का व्रत रखना चाहिए और भगवन शिव जी की पूजा कर उन्हें सफेद मिठाई का भोग लगाना चाहिए. इसी के साथ ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए.

केतु ग्रह शांति उपाय

यदि जन्‍मकुंडली या वर्ष में ये ग्रह अशुभ हो तो केतु के बीजमंत्र (ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः) का 17000 बार जाप करें. घर में राहु यंत्र की स्थापना से भी लाभ संभव है. केतु ग्रह से पीड़ित जातक को केतु की दशा के समय लोहे की वस्तु , कंबल इत्यादि दान में देना चाहिए.

केतु से सम्बंधित समस्याओं के लिए केला, तिल, काले रंग के कंबल आदि का दान करना अत्यंत लाभकारी रहता है.

एक अन्य उपाय है कि अगर केतु की दशा खराब चल रही है तो किसी शनिवार के दिन एक छोटा काला पत्थर लांए, इसे तिल के तेल में डुबोकर 7 बार अपने ऊपर से उतार लें और अब इस पत्थर को दहकती आंच में डाल दें. वहीं ठंडा होने के बाद इस पत्थर को घर से दूर किसी सूखे कुएं में फेंक दें. ये उपाय कर लेने से आपका ग्रह दोष शांत हो जाएगा.