Name Of 51 Shakti Peeth Place Body Parts Temple List In Hindi

माता के 51 शक्तिपीठ | Name | Place | List In Hindi Pdf

Dharma Karma
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3 51 शक्तिपीठ के नाम (Names Of 51 Shakti Peeth)
4 51 शक्तिपीठ स्थान (51 Shakti Peeth Location)

माता की शक्ति पीठ (Mata Ki Shakti peeth)

क्या हैं शक्तिपीठ

हिन्दू धर्म के अनुसार जहाँ सती देवी के शरीर के जो अंग गिरे, वहाँ वहाँ शक्ति पीठ (51 shakti peeth) बन गईं. ये  ही पावन तीर्थ कहलाये. ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं तथा हिन्दू धर्म के  पुराणों के अनुसार सती के शव के विभिन्न अंगों से बावन शक्तिपीठों का निर्माण हुआ था.

कहा जाता है कि शक्ति का पीठ या वह पवित्र, धार्मिक स्थान है जहाँ किसी शक्ति या देवी का वास माना जाता है.

मानना है कि भगवती सती ने शिवजी को दर्शन दिए और उनसे कहा कि जिस-जिस स्थान पर उनके शरीर के अंग अलग होकर गिरेंगे, वहाँ  महाशक्तिपीठ (51 shakti peeth temple)का उदय होगा.

शास्‍त्रों के अनुसार इस प्रकार जहां-जहां माता सती के अंग के टुकड़े गिरे या उनके वस्त्र तथा आभूषण गिरे , वहां-वहां शक्तिपीठ का उदय हुआ और इस तरह कुल 51 स्थानों में माता के शक्तिपीठों (51 shakti peeth in india) का निर्माण भी हुआ.

मान्यता के अनुसार परा शक्ति माँ सती के अंग जहाँ जहाँ गिरे थे वो स्थान शक्ति पीठ कहलाया। क्योंकि ये परा शक्ति के अंग थे और यह काफी ऊर्जावान स्थान था. इस स्थान पर कोई व्यक्ति साधना, या पूजा – अर्चना , ध्यान आदि करे तो उसको बहुत ही जल्दी सफलता मिलती है. क्योंकि यहाँ से सूक्ष्म ऊर्जा की तरंगें  हमेशा निकलती रहती हैं  जो कि जातक के सूक्ष्म शरीर पर प्रभाव डालती है जिससे उसकी गति बहुत तीव्र या तेज हो जाती है.

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51 शक्ति पीठ के दर्शन (51 Shakti Peeth Darshan)

51 शक्ति पीठ के दर्शन से लाभ

51 शक्ति पीठ के दर्शन करने से जातक / जातिका को सुख सम्रद्धि प्राप्त होती है  उसको कभी भी कोई हानि नही होती है.

51 शक्ति पीठ के दर्शन करने से जातक को कभी धन – धान्य की कमी नहीं रहती एवं उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

ऐसा कहा जाता है कि जातक के घर में कोई बाहरी बुरी आत्मा का प्रवेश नहीं होता है तथा उसके घर में सुख – शान्ति बनी रहती है.

शक्ति पीठ के दर्शन करने से सभी मनोकामनाएँ सिद्ध होती हैं एवं किसी भी कार्य में कोई अड़चन भी नहीं आती है.

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 51 शक्तिपीठ  के नाम (Names Of 51 Shakti Peeth)

1. किरीट शक्तिपीठ:  

कहा जाता है कि किरीट शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के हुगली नदी के तट लालबाग कोट पर मौजूद है. यहाँ माता सती का किरीट यानी शिराभूषण अथवा मुकुट गिरा था. यहां शक्ति विमला अथवा भुवनेश्वरी तथा भैरव संवर्त को पूजा जाता है.

2. कात्यायनी शक्तिपीठ:

यह वृन्दावन, मथुरा के भूतेश्वर में स्थित है. कात्यायनी वृन्दावन शक्तिपीठ में माता सती के केशपाश गिरे थे. यहाँ  देवी कात्यायनी तथा भैरव भूतेश को पूजा जाता है.

3. करवीर शक्तिपीठ:

ऐसा कहा जाता है कि करवीर शक्तिपीठ महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है. इस शक्तिपीठ में माता के त्रिनेत्र गिरे थे. यहाँ की शक्ति महिषासुरमर्दिनी तथा भैरव क्रोधशिश हैं. इस स्थान को महालक्ष्मी का निज निवास माना जाता है.

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4. श्री पर्वत शक्तिपीठ:

इस शक्तिपीठ को लेकर विद्वानों के मत में अंतर है. दरअसल कुछ विद्वानों का मानना है कि इस पीठ का मूल स्थल लद्दाख है, वहीं कुछ मानते हैं कि यह असम के सिलहट में है. इस स्थान पर माता सती का दक्षिण तल्प यानी कनपटी गिरी थी. यहां की शक्ति श्री सुन्दरी एवं भैरव सुन्दरानन्द जी हैं.

5. विशालाक्षी शक्तिपीठ:

यह मान्यता है कि यह शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी के मीरघाट पर स्थित है. इस स्थान पर माता सती के दाहिने कान के मणि गिरी थी। यहां की शक्ति विशालाक्षी तथा भैरव काल भैरव हैं.

6. गोदावरी तट शक्तिपीठ:

कहा जाता है कि आंध्रप्रदेश के कब्बूर में गोदावरी तट पर यह शक्तिपीठ मौजूद है. यहाँ माता का वामगण्ड यानी बायां कपोल गिरा था. यहाँ की शक्ति विश्वेश्वरी या रुक्मणी तथा भैरव दण्डपाणि हैं.

7. शुचीन्द्रम शक्तिपीठ:

माना जाता है कि शुची शक्तिपीठ तमिलनाडु के कन्याकुमारी के त्रिसागर संगम स्थल पर स्थित है. इस जगह पर सती माता के मतान्तर से पृष्ठ भाग गिरे थे. यहां की शक्ति नारायणी तथा भैरव संहार या संकूर हैं.

8. पंच सागर शक्तिपीठ:

आपको बता दें कि इस शक्तिपीठ का कोई निश्चित स्थान ज्ञात नहीं है लेकिन माना जाता है कि यहाँ  माता के नीचे के दांत गिरे थे. यहां की शक्ति वाराही तथा भैरव महारुद्र हैं.

9. ज्वालामुखी शक्तिपीठ:

ज्वालामुखी शक्तिपीठ हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा में स्थित है. यहाँ  माता सती की जीभ गिरी थी. यहाँ  की शक्ति सिद्धिदा व भैरव उन्मत्त हैं.

10. भैरव पर्वत शक्तिपीठ:

कहा जाता है कि इस शक्तिपीठ के स्थान को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं. कुछ लोग गुजरात के गिरिनार के निकट भैरव पर्वत को तो कुछ मध्य प्रदेश के उज्जैन के निकट क्षिप्रा नदी तट पर वास्तविक शक्तिपीठ मानते हैं, जहां माता का ऊपर का ओष्ठ गिरा है. यहां की शक्ति अवन्ती तथा भैरव लंबकर्ण हैं.

11. अट्टहास शक्तिपीठ:

कहा जाता है कि अट्टहास शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के लाबपुर में स्थित है. यहाँ  माता का अध्रोष्ठ यानी नीचे का होंठ गिरा था. यहाँ  की शक्ति फुल्लरा तथा भैरव विश्वेश हैं.

12. जनस्थान शक्तिपीठ :

महाराष्ट्र नासिक के पंचवटी में जनस्थान शक्तिपीठ स्थित है. इस स्थान पर माता की ठुड्डी गिरी थी. यहां की शक्ति भ्रामरी तथा भैरव विकृताक्ष हैं.

13. कश्मीर शक्तिपीठ या अमरनाथ शक्तिपीठ :

जम्मू-कश्मीर के अमरनाथ में स्थित इस शक्तिपीठ में माता का कण्ठ गिरा था. यहाँ की शक्ति महामाया तथा भैरव त्रिसंध्येश्वर हैं.

14. नन्दीपुर शक्तिपीठ :

पश्चिम बंगाल के सैन्थया में स्थित इस शक्तिपीठ में देवी की देह का कण्ठहार गिरा था. इस स्थान की शक्ति नन्दनी और भैरव निन्दकेश्वर हैं.

15. श्री शैल शक्तिपीठ:

यह आंध्रप्रदेश के कुर्नूल के पास श्री शैल का शक्तिपीठ है. इस जगह पर माता की ग्रीवा गिरी थी. यहाँ की शक्ति महालक्ष्मी तथा भैरव संवरानन्द अथवा ईश्वरानन्द हैं.

16. नलहटी शक्तिपीठ:

पश्चिम बंगाल के बोलपुर में नलहटी शक्तिपीठ स्थित है. इस स्थल पर माता की उदरनली गिरी थी. यहाँ की शक्ति कालिका तथा भैरव योगीश हैं.

17. मिथिला शक्तिपीठ:

इसके निश्चित स्थान को लेकर मतभेद हैं. अलग अलग मतों के अनुसार तीन स्थानों पर मिथिला शक्तिपीठ बताया जाता है. माना जाता है कि नेपाल के जनकपुर, बिहार के समस्तीपुर और सहरसा में माता का वाम स्कंध गिरा था. यहाँ की शक्ति उमा या महादेवी तथा भैरव महोदर हैं.

18. रत्नावली शक्तिपीठ:

इसका निश्चित स्थान अज्ञात है. माना जाता है कि रत्नावली शक्तिपीठ तमिलनाडु के चेन्नई में कहीं स्थित है. इस जगह पर माता का दक्षिण स्कंध गिरा था. यहाँ की शक्ति कुमारी तथा भैरव शिव हैं.

19. अम्बाजी शक्तिपीठ:

गुजरात जूनागढ़ के गिरनार पर्वत के शिखर पर माता का उदर गिरा था. इस स्थान पर देवी अम्बिका का भव्य मंदिर है. यहाँ की शक्ति चन्द्रभागा तथा भैरव वक्रतुण्ड हैं.

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20. जालंधर शक्तिपीठ:

यह शक्तिपीठ पंजाब के जालंधर में स्थित है. इस स्थान पर माता का वामस्तन गिरा था. यहाँ की शक्ति त्रिपुरमालिनी तथा भैरव भीषण हैं.

21. रामागिरि शक्तिपीठ:

इस शक्तिपीठ के स्थान को लेकर भी मतभेद हैं. कुछ लोग यह उत्तर प्रदेश के चित्रकूट तो कुछ मध्यप्रदेश के मैहर में यह स्थान मानते हैं. इस जगह पर माता का दाहिना स्तन गिरा था. यहां की शक्ति शिवानी तथा भैरव चण्ड हैं.

22. वैद्यनाथ शक्तिपीठ:

वैद्यनाथ शक्तिपीठ झारखंड के गिरिडीह, देवघर में स्थित है. यहां की शक्ति जयदुर्गा तथा भैरव वैद्यनाथ हैं . ऐसी मान्यता है कि यहाँ  पर सती का दाह-संस्कार हुआ था.

23. वक्त्रेश्वर शक्तिपीठ:

 यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के सैन्थया में स्थित है. इस स्थान पर माता का मन गिरा था. यहाँ की शक्ति महिषासुरमर्दिनी तथा भैरव वक्त्रानाथ हैं.

24. कन्याकुमारी शक्तिपीठ:

कण्यकाश्रम शक्तिपीठ तमिलनाडु के कन्याकुमारी के तीन सागरों हिन्द महासागर, अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित है. इस जगह पर माता की पीठ गिरी थी. यहाँ  की शक्ति शर्वाणि या नारायणी तथा भैरव निमषि या स्थाणु हैं.

25. बहुला शक्तिपीठ:

बहुला शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के कटवा जंक्शन के निकट केतुग्राम में स्थित है. यहाँ  माता का वाम बाहु गिरा था. यहाँ की शक्ति बहुला तथा भैरव भीरुक हैं.

26. उज्जयिनी शक्तिपीठ:

उज्जयिनी हरसिद्धि शक्तिपीठ मध्य प्रदेश के उज्जैन के पावन क्षिप्रा के दोनों तटों पर स्थित है. यहाँ माता की कोहनी गिरी थी. यहाँ  की शक्ति मंगल चण्डिका तथा भैरव मांगल्य कपिलांबर हैं.

27. मणिवेदिका शक्तिपीठ:

गायत्री मंदिर के नाम से मशहूर यह शक्तिपीठ राजस्थान के पुष्कर में स्थित है. यहाँ माता की कलाइयां गिरी थीं. यहाँ की शक्ति गायत्री तथा भैरव शर्वानन्द हैं.

28. प्रयाग शक्तिपीठ:

 यह उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में स्थित है. इस जगह पर माता के हाथ की अंगुलियां गिरी थीं . इसके स्थान को लेकर भी मतभेद है. इसे अक्षयवट, मीरापुर और अलोपी स्थानों पर गिरा माना जाता है. तीनों शक्तिपीठ की शक्ति ललिता हैं तथा भैरव भव हैं.

29. उत्कल शक्तिपीठ:

यह स्थान उड़ीसा के पुरी और याजपुर में माना जाता है. यहाँ माता की नाभि गिरी थी . इस शक्तिपीठ की शक्ति विमला तथा भैरव जगन्नाथ पुरुषोत्तम हैं.

30. कांची शक्तिपीठ:

कांची शक्तिपीठ तमिलनाडु के कांचीवरम् में स्थित है. इस जगह पर माता का कंकाल शरीर गिरा था.यहां की शक्ति देवगर्भा तथा भैरव रुरु हैं.

31. कालमाधव शक्तिपीठ:

इस शक्तिपीठ के बारे कोई निश्चित स्थान पता नहीं है. माना जाता है कि यहाँ  माता का वाम नितम्ब गिरा था. यहां की शक्ति काली तथा भैरव असितांग हैं.

32. शोण शक्तिपीठ:

मध्य प्रदेश के अमरकंटक के नर्मदा पर मन्दिर शोण शक्तिपीठ स्थित है. यहां माता का दायाँ नितम्ब गिरा था. एक अन्य मान्यता के अनुसार बिहार के सासाराम का ताराचण्डी मंदिर ही शोण तटस्था शक्तिपीठ है. यहाँ सती का दायां नेत्रा गिरा था. यहाँ  की शक्ति नर्मदा या शोणाक्षी तथा भैरव भद्रसेन हैं.

33. कामाख्या शक्तिपीठ:

यह मशहूर शक्तिपीठ असम गुवाहाटी के कामगिरि पर्वत पर स्थित है. यहाँ माता की योनि गिरी थी. यहां की शक्ति कामाख्या तथा भैरव उमानन्द हैं.

34. जयंती शक्तिपीठ:

जयंती शक्तिपीठ मेघालय के जयंतिया पहाडी पर स्थित है . इस स्थान पर माता की वाम जंघा गिरी थी. यहाँ की शक्ति जयंती तथा भैरव क्रमदीश्वर हैं.

35. मगध शक्तिपीठ:

बिहार की राजधनी पटना में स्थित पटनेश्वरी देवी को ही शक्तिपीठ माना जाता है. इस जगह पर माता की दाहिना जंघा गिरी थी. यहाँ की शक्ति सर्वानन्दकरी तथा भैरव व्योमकेश हैं.

36. त्रिस्तोता शक्तिपीठ:

त्रिस्तोता शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी के शालवाड़ी गांव में तीस्ता नदी पर स्थित है. यहाँ माता का वामपाद गिरा था. यहां की शक्ति भ्रामरी तथा भैरव ईश्वर हैं.

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37. त्रिपुरी सुन्दरी शक्तिपीठ:

माता का दक्षिण पाद त्रिपुरा के राध किशोर ग्राम में गिरा था और उसी जगह पर त्रिपुरा सुन्दरी शक्तिपीठ मौजूद है. यहाँ  की शक्ति त्रिपुर सुन्दरी तथा भैरव त्रिपुरेश हैं.

38. विभाषा शक्तिपीठ:

विभाषा शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के ताम्रलुक ग्राम में स्थित है. इस स्थान पर माता का वाम टखना गिरा था. यहाँ  की शक्ति कपालिनी, भीमरूपा तथा भैरव सर्वानन्द हैं.

39. कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ:

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जंक्शन के निकट द्वैपायन सरोवर के पास कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ है. इसे श्रीदेवीकूप भद्रकाली पीठ के नाम से भी जाना जाता है. इस पवित्र स्थान पर माता के दाहिने चरण गिरे थे. यहाँ की शक्ति सावित्री तथा भैरव स्थाणु हैं.

40. युगाद्या शक्तिपीठ, क्षीरग्राम शक्तिपीठ:

युगाद्या शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बर्दमान जिले के क्षीरग्राम में स्थित है. यहाँ  सती माता के दाहिने चरण का अंगूठा गिरा था. यहाँ की शक्ति जुगाड़या और भैरव क्षीर खंडक है.

41. विराट अम्बिका शक्तिपीठ:

यह शक्तिपीठ राजस्थान के गुलाबी नगरी जयपुर के वैराटग्राम में स्थित है. माता सती के दाहिने पैर की अंगुलियां यहां गिरी थीं. यहाँ  की शक्ति अंबिका तथा भैरव अमृत हैं.

42. कालीघाट शक्तिपीठ:

कालीमन्दिर के नाम से विख्यात यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल, कोलकाता के कालीघाट में स्थित है. यहां माता के दाहिने पैर के अंगूठे को छोड़ 4 अन्य अंगुलियां गिरी थीं. यहाँ की शक्ति कालिका तथा भैरव नकुलेश हैं.

43. मानस:

मानस शक्तिपीठ तिब्बत के मानसरोवर तट पर स्थित है. इस स्थान पर माता की दाहिनी हथेली गिरी थी. यहाँ की शक्ति द्राक्षायणी तथा भैरव अमर हैं.

44. लंका शक्तिपीठ:

माता सती के पायल श्रीलंका में स्थित लंका शक्तिपीठ वाले स्थान पर गिरे थे. यहाँ की शक्ति इन्द्राक्षी तथा भैरव राक्षसेश्वर हैं. इस शक्तिपीठ के सही स्थान को लेकर संशय है.

45. गण्डकी शक्तिपीठ:

गण्डकी शक्तिपीठ नेपाल में गण्डकी नदी के उद्गम स्थल पर मौजूद है. यहाँ माता सती का दक्षिण कपोल गिरा था. यहां शक्ति गण्डकी तथा भैरव चक्रपाणि हैं.

46. गुह्येश्वरी शक्तिपीठ:

गुह्येश्वरी शक्तिपीठ नेपाल के काठमाण्डू में पशुपतिनाथ मंदिर के नजदीक ही स्थित है. इस स्थान पर माता सती के दोनों घुटने गिरे थे. यहाँ  की शक्ति महामाया और भैरव कपाल हैं.

47. हिंगलाज शक्तिपीठ:

हिंगलाज शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त में स्थित है.यहाँ  माता का ब्रह्मरन्ध्र (सिर का ऊपरी भाग) गिरा था. यहाँ  की शक्ति कोट्टरी और भैरव भीमलोचन है.  

48. सुगंध शक्तिपीठ:

बांग्लादेश के खुलना में सुगंध नदी के तट पर उग्रतारा देवी का शक्तिपीठ स्थित है, जहां माता की नासिका गिरी थी. यहाँ की देवी सुनन्दा (मतांतर से सुगंधा) है तथा भैरव त्रयम्बक हैं.

49. करतोया शक्तिपीठ:

करतोयाघाट शक्तिपीठ बंग्लादेश के भवानीपुर के बेगड़ा में करतोया नदी के तट पर स्थित है. इस जगह पर माता की वाम तल्प गिरी थी. यहाँ देवी अपर्णा रूप में तथा शिव वामन भैरव रूप में वास करते हैं.

50. चट्टल शक्तिपीठ:

चट्टल शक्तिपीठ बंग्लादेश के चटगांव में स्थित है .ये वो स्थान है जहां माता की दाहिनी भुजा गिरी थी. यहाँ  की शक्ति भवानी तथा भैरव चन्द्रशेखर हैं.

51. यशोर शक्तिपीठ:

माता का यशोरेश्वरी शक्तिपीठ बांग्लादेश के जैसोर खुलना में स्थित है. यहां माता की बायीं हथेली गिरी थी. यहाँ शक्ति यशोरेश्वरी तथा भैरव चन्द्र हैं.

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51 शक्तिपीठ स्थान (51 Shakti Peeth Location)

1. कश्मीर या अमरनाथ :

यह जम्मू-कश्मीर के अमरनाथ में स्थित है. यहाँ माता का कण्ठ गिरा था.

2.कात्यायनी :

यह वृन्दावन, मथुरा के भूतेश्वर में स्थित है. यहाँ  केशपाश गिरा था.

3. विशालाक्षी :

यह उत्तर प्रदेश, वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर स्थित है. दाहिने कान के मणि गिरे थे.

4. प्रयाग :

यह उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में स्थित है. यहाँ माता की हाथ की अंगुलियां गिरी थीं.

5. ज्वालामुखी :

यह हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित है. यहां सती का जिह्वा गिरी थी.

6. जालंध्र :

यह पंजाब के जालंधर में स्थित है. यहाँ वामस्तन गिरा था.

7. देवीकूप पीठ कुरुक्षेत्र :

यह हरियाणा के कुरुक्षेत्र के निकट द्वैपायन सरोवर के पास स्थित है. इसे श्रीदेवीकूप भद्रकाली पीठ के नाम से मान्यता है. यहाँ माता का दहिना चरण गिरा था.

8. मगध :

बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटनेश्वरी देवी को ही शक्तिपीठ माना जाता है. यहाँ  माता की दाहिनी जंघा गिरी थी.

9. मानस शक्तिपीठ:

यह तिब्बत के मानसरोवर तट पर स्थित है. माता की दाहिनी हथेली गिरी थी.

10. करवीर :

यह महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है. जहाँ माता का त्रिनेत्र गिरा था. यहाँ  महालक्ष्मी का निज निवास माना जाता है.

11. जनस्थान :

यह महाराष्ट्र में नासिक स्थित पंचवटी में स्थित है. यहाँ माता की ठोड़ी गिरी थी.

12. अम्बाजी :

यह गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित है. यहाँ माता का दिल गिरा था. कुछ ग्रंथों में जूनागढ़ के गिरनार पर्वत के शक्तिपीठ होने और उदर गिरने की मान्यता है.

13. मणिवेदिका :

यह राजस्थान के पुष्कर में स्थित है तथा इसे गायत्री मन्दिर के नाम से जाना जाता है. यहाँ कलाइयां गिरी थीं.

14. विराट का अम्बिका :

यह जयपुर के वैराटग्राम में स्थित है. यहां सती के ‘दाएं पांव की अंगुलियां गिरी थीं.

15. गोदावरी तट :

यह आंध्र प्रदेश के कब्बूर में गोदावरी तट पर स्थित है. जहाँ माता का बायां कपोल गिरा था.

16. शुचीन्द्रम :

यह तमिलनाडु, कन्याकुमारी के त्रिसागर संगम स्थल पर स्थित है , जहां सती के ऊर्ध्वदन्त गिरे थे.

17. श्री शैल :

यह आंध्र प्रदेश के कुर्नूल के पास स्थित है. माता की ग्रीवा गिरी थी.

18. कांची :

यह तमिलनाडु के कांचीवरम में स्थित है. यहां माता का कंकाल गिरा था.

19. कण्यकाश्रम कन्याकुमारी :

तमिलनाडु के कन्याकुमारी के तीन सागरों हिन्द महासागर, अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित है. यहाँ माता का पीठ मतान्तर से ऊर्ध्वदन्त गिरे थे.

20. किरीट :

यह हुगली नदी के तट लालबाग कोट पर स्थित है. यहां किरीट यानी शिरोभूषण या मुकुट गिरा था.

21. अट्टहास :

यह लाबपुर में स्थित है. यहाँ  नीचे का होंठ गिरा था.

22. नन्दीपुर :

यह सैन्थया में स्थित है. यहाँ कण्ठहार गिरा था.

23. नलहटी :

बोलपुर में उदरनली गिरी थी. जिसे नलहटी के नाम से जानते हैं.

24. बहुला :

यह कटवा जंक्शन के निकट केतुग्राम में स्थित है. यहाँ माता का वाम बाहु गिरा था.

25. त्रिस्तोता :

यह जलपाइगुड़ी के शालवाड़ी गांव में तीस्ता नदी पर स्थित है. यहाँ  माता का वामपाद गिरा था.

26 . विभाष :

यह मिदनापुर में स्थित है. यहाँ वाम टखना गिरा था.

27. युगाद्या :

यह बर्दमान जिले के क्षीरग्राम में है. यहाँ सती के दाहिने चरण का अंगूठा गिरा था.

28. कालीघाट :

यह कालीमन्दिर के नाम से प्रसिद्ध है.  दाएं पांव का अंगूठा छोड़ 4 अन्य अंगुलियां गिरी थीं.

29. वक्रेश्वर :

यह सिन्थेया में स्थित है. यहाँ मन गिरा था.

30. कामाख्या :

यह गुवाहाटी का कामगिरि पर्वत पर स्थित है. योनिदेश गिरा था.

31. जयन्ती :

यह मेघालय की जयन्तिया पहाड़ी में स्थित है. वाम जंघा गिरी थी.

32. त्रिपुरसुन्दरी :

यह त्रिपुरा के राध किशोर ग्राम में स्थित है. जहाँ माता का दक्षिण पाद गिरा था.

33. विरजाक्षेत्र, उत्कल :

यह उड़ीसा के पुरी और याजपुर में माना जाता है, जहां माता की नाभि गिरी थी.

34. वैद्यनाथ :

यह झारखण्ड के गिरिडीह, देवघर में स्थित है. यहाँ  माता का हृदय गिरा था. मान्यता है, यहीं सती का दाह-संस्कार हुआ था.

35. उज्जयिनी :

यह मध्य प्रदेश के उज्जैन के क्षिप्रा के दोनों तटों पर स्थित है. जहाँ माता की कोहनियां गिरी थीं.

36. शोण :

यह मध्य प्रदेश के अमरकंटक का नर्मदा मन्दिर में स्थित है. यहाँ  माता का दक्षिण नितम्ब गिरा था. यह भी मान्यता है कि बिहार के सासाराम का ताराचण्डी मन्दिर ही शोण तटस्था शक्तिपीठ है.

37. लंका :

यह श्रीलंका में स्थित है. यहाँ  नूपुर गिरे थे. यह ठीक-ठीक ज्ञात नहीं है कि किस स्थान पर गिरे थे.

38. गण्डकी :

यह नेपाल में गण्डकी नदी के उद‌्गम पर स्थित है. सती के कपोल गिरे थे.

39. गुह्येश्वरी :

यह नेपाल के काठमाण्डू में पशुपतिनाथ मन्दिर के पास स्थित है. यहाँ  दोनों घुटने गिरे थे.

40. हिंगलाज :

यह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त में स्थित है. माता की ब्रह्मरन्ध्र गिरा था.

41. सुगंध :

यह बांग्लादेश के खुलना में सुगंध नदी के तट पर स्थित है. यहाँ  माता की नासिका गिरी थी.

42. करतोयाघाट :

यह बंग्लादेश भवानीपुर के बेगड़ा में करतोया नदी के तट पर स्थित है. जहाँ माता का वाम तल्प गिरा था.

43. चट्टल :

यह बंग्लादेश के चटगांव में स्थित है. यहां दाहिनी भुजा गिरी थी.

44. यशोर:

यह बांग्लादेश के जैसोर खुलना में स्थित है. यहाँ  बायीं हथेली गिरी थी.

45. श्री पर्वत शक्तिपीठ:

कुछ विद्वानों का मानना है कि इस पीठ का मूल स्थल लद्दाख है, कुछ का मानना है कि यह असम के सिलहट में स्थित है.

46.पंच सागर शक्तिपीठ :

इस शक्तिपीठ का कोई निश्चित स्थान ज्ञात नहीं है.

47. भैरव पर्वत शक्तिपीठ :

कुछ गुजरात के गिरिनार के निकट भैरव पर्वत को तो कुछ मध्य प्रदेश के उज्जैन के निकट क्षिप्रा नदी तट पर इसे मानते हैं.

48. मिथिला शक्तिपीठ:

नेपाल के जनकपुर, बिहार के समस्तीपुर और सहरसा में इसकी स्थापना मानी जाती है.

49. रत्नावली शक्तिपीठ:

कहा जाता है कि तमिलनाडु के चेन्नई में कहीं पर यह स्थित है.

50. कालमाधव शक्तिपीठ :

इस शक्तिपीठ के बारे कोई निश्चित स्थान ज्ञात नहीं है.

51.रामगिरि शक्तिपीठ :

 रामगिरि शक्तिपीठ कुछ लोग मध्यप्रदेश के मैहर में मानते हैं.

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