Rakshas Gan in Hindi राक्षस गण वाले होते हैं ख़ास दूर करें भ्रम

Rakshas Gan in Hindi | राक्षस गण वाले होते हैं ख़ास |दूर करें भ्रम

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Rakshas Gan in Hindi राक्षस गण के बारे में सम्पूर्ण जानकारी.जानें विशेषताएं एवं प्रभाव क्या होता है. मनुष्य गण, देव गण व राक्षस गण.कैसे करें गण की पहचान

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Rakshas Gan in Hindi- Rakshas Gan

जन सामान्य में मान्यता है कि राक्षस गण के लोग अच्छे नहीं होते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नही है.हिन्दू धर्म में जन्में शिशु के वारे में बहुत सी बातें जानने की जिज्ञासा होती है. इसमें स्वभाव, लव लाइफ सुख दुःख जैसे बहुत सी बातें शामिल हैं. ग्रहों और नक्षत्रों की गति की वजह से ये सब निर्धारित होता है.  इसी कारण वह किसी न किसी गण का जातक होता है जो उसके स्वाभाव का निर्माणकर्ता होता हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दू धर्म में तीन गण होते हैं. यह व्यक्ति की आदतों के निर्माण से लेकर उसके स्वाभाव,उसके लक्ष्य प्राप्ति, उसके व्यवहार और सुख शांति और उसके रिश्तों को निर्माण करने के लिए उत्तरदायी होते हैं. इनमें एक गण राक्षस गण होता है . इसमें कुछ गुण होते हैं जो जातक को विशेष प्रतिभा का धनी बनाते हैं. एवं उनकी यही प्रतिभा उनको विशेष व्यक्तित्व वाला बनाती है. 

हम लोग दैनिक जीवन में कई बार राक्षस गण शब्द को सुनते हैं, लेकिन क्या आपको मालूम है कि  Rakshas Gan  का सही मतलब क्या होता है. वास्तव में मनुष्य के जन्म को नक्षत्र के माध्यम से देव गण, मनुष्य गण और राक्षस गण तीन गणों में बांटा गया है. मान्यता है कि देव गण सर्वश्रेष्ठ होता है और मनुष्य गण सामान्य होता है तथा राक्षस का नाम सुनते ही मन में नकारात्मक विचार आने लगते हैं. लोग समझते हैं कि राक्षस गण वाले जातकों में राक्षसों जैसे ही गुण विद्यमान होते हैं, लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि राक्षस गण वाले जातकों के पास ऐसी शक्तियां होती हैं जो अन्य दोनों गण वाले जातकों के पास नहीं होतीं एवं यही शक्तियां इन्हें विशिष्ट बनाती हैं. 

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Rakshasa Gana Characteristics

राक्षस गण से संबंध रखने वाले लोगों में काफी विशेषताएँ होती हैं जो जीवन को प्रसन्न और सफल बनाती हैं 

राक्षस गण वालों की छठी इंद्री होती है जागृत

वातावरण में नकारात्‍मक और सकारात्‍मक शक्‍तियां उपस्थित होती हैं। राक्षस गण के लोग नकारात्‍मक ऊर्जा को आसानी से पहचान लेते है। राक्षस गण के लोगों की छठी इंद्री काफी हद तक जागृत होती है।

राक्षस गण वाले होते हैं साहसी और मजबूत इच्‍छाशक्‍ति वाले

राक्षस गण वाले लोग साहसी और मजबूत इच्‍छाशक्‍ति वाले होते हैं। और विपरीत स्थितियों में लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयास करते रहते हैं. ये लोग अपने जीवन को स्‍वच्‍छंद तरीके से जीना पसंद करते हैं।

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राक्षस गण वाले लोग काम निकालने में होते हैं माहिर

ये जातक बोलने में चतुर, चालाक, और काम निकालने में माहिर होते है। तो हम कह सकते हैं कि राक्षस गण वाले जातक कुशल वक्ता के रूप में अपना भविष्य निर्धारित कर सकते हैं.     

राक्षस गण वाले मिनटों में करते हैं प्रॉब्लम सॉल्व

राक्षस गण में जन्मे लोग अच्छे प्रॉब्लम सॉल्वर होते हैं. इतना ही नहीं ये लोग दयालु एवं मेहनती होने के साथ साथ संतोषी भी होते हैं और इन्हीं कारणों से इनको समाज में भरपूर मान सम्मान मिलता है. 

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राक्षस गण वालों के आसानी से बिगड़ जाते हैं रिश्ते

राक्षस गण के अंतर्गत जन्में जातकों के लिए रिश्तों कि तुलना में भावनाएं बहुत महत्वपूर्ण होती हैं. जिद्दी होने की वजह से इनके रिश्ते आसानी से बिगड़ जाते हैं 

राक्षस गण के लोग स्वयं को देते हैं प्राथमिकता

इनकी प्राथमिकता में ये स्वयं होते हैं इसलिए इनके शब्दों में कटुता होती है. शब्दों की यही कटुता इनके लिए अक्सर संकट खड़ा करती रहती है 

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Rakshas Yoni(राक्षस योनी)

ज्‍योतिषशास्‍त्र में मनुष्‍य को तीन गणों में बांटा गया है – देव गण, मनुष्‍य गण और राक्षस गण(rakshas gana)। इन गणों के आधार पर ही मनुष्य का स्वभाव और उनका चरित्र भी बताया गया है. जब किसी मनुष्य का जन्म होता है तो उस समय के गृह-नक्षत्रों की स्थिति ही उसके गण को तय करती है. राक्षस गण वाले व्यक्ति को डरने की जरुरत नहीं है आप कोई राक्षस नहीं हो लेकिन इन दोनों गण के लोगों से आप काफी अलग हो. ज्योतिष की माने तो राक्षस गण वाले व्यक्ति को नेगेटिव एनर्जी का आभास जल्दी हो जाता है. इन लोगो का सिक्स्थ सेंस बेहतर तरीके से काम करता है.

Rakshas Gan Male Characteristics

राक्षस गण मेल (male) में बहुत सी विशेषताएँ होती हैं  जो उन्हें परिवार में सम्मान दिलाती हैं.  राक्षस गण के मेल (Rakshas Gan Male)अच्छे पढ़े लिखे होते है व बेहतर समझ होने से परिवार में अच्छा मान सम्मान पाते हैं. इस कारण से परिवार से काफी लाभ प्राप्त करते हैं.

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स्वाभाव से साहसी होते हैं राक्षस गण मेल-( Rakshas Gan Male)

राक्षस गण मेल स्वाभाविक रूप से साहसी होते हैं इसलिए ये अधिकतर क्षेत्रों में सफल रहते हैं . लेकिन इसी गुण की  वजह से वह स्वयं पर नियंत्रण खो जाते हैं . 

अच्छे कम्यूनिकेटर होते हैं राक्षस गण मेल

राक्षस गण मेल बेहतर समझ रखते हैं यह गुण इन्हें आत्मविश्वास से परिपूर्ण करता है. इसलिए राक्षस गण के मेल जातक प्रभावशाली वक्ता होते हैं . और लोगों को बहुत जल्दी प्रभावित कर लेते हैं .

अपने प्रति होते हैं संवेदनशील राक्षस गण मेल

राक्षस गण मेल अपने प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं जिसकी वह जिद्दी स्वाभाव रखते हैं, इसलिए उनकी बोली में मिठास नहीं होती है.

राक्षस गण मेल दूसरों से नहीं होते हैं सहमत

राक्षस गण मेल दूसरों से आसानी से सहमत नहीं होते हैं , इसलिए कहीं भी झगड़े हो जाते हैंऔर ज्यादातर जगह यह अपना नुकसान कर बैठते हैं. 

राक्षस गण फीमेल (Female )की विशेषताएं – (Rakshas Gan Girl Characteristics)

राक्षस गण की फीमेल(Rakshas Ganfemale) विशेषताओं से परिपूर्ण होती हैं जो उन्हें बेहद आकर्षक और सफल गृहणी बनाती हैं.  लेकिन इनमें  कुछ स्वाभाविक आदतें होती हैं जो इनके जीवन को शान्ति पूर्ण नहीं रहने देती हैं तो देखें Rakshas Gan Girl Characteristics इनके गुण और आदतें 

आध्यात्मिक होती हैं राक्षस गण फीमेल

राक्षस गण फीमेल काफी हद तक आध्यात्मिक होती हैं इसलिए इनका जीवन बेहद धार्मिक संतुलित और सादगी पूर्ण होता है. यह अपने जीवन में प्रसन्न रहती हैं. यह परिवार के सदस्यों से अपेक्षायें नहीं रखती हैं . 

न्याय प्रिय होती हैं राक्षस गण की महिलायें

राक्षस गण की  फीमेल अच्छे बुरे के अंतर को जल्दी महसूस कर लेती हैं .इनका सिक्स सेंस बहुत अच्छा होता है इसलिए राक्षस गण की फीमेल न्याय प्रिय होती हैं .  

अच्छी प्लानर होती हैं राक्षस गण की महिलायें

राक्षस गण की फीमेल बेहद प्रतिभाशाली होती हैं .यह वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को अच्छे से पहचानती हैं इसलिए यह बहुत अच्छी योजनाकार होती हैं . 

आत्मकेंद्रित होती हैं राक्षस गण की महिलाएं

राक्षस गण फीमेल आत्मकेंद्रित होती हैं .इसलिए यह अपने काम में किसी की  दखलंदाजी को बिल्कुल को भी पसंद नहीं करती हैं अगर किसी ने इनके काम और बातों में दखलंदाजी कर दी तो राक्षस गण की फीमेल उससे कलह करना शुरू कर देती हैं .   

रिश्तों की परवाह नहीं करती हैं राक्षस गण की स्त्रियाँ

राक्षस गण की फीमेल (rakshas gan female)जातक जब किसी कारण वश उग्र होती हैं तो फिर वह किसी भी रिश्ते की बिल्कुल भी परवाह नहीं करती हैं  और वह सिर्फ जीतना चाहती हैं.

इन नक्षत्रों से बनता है राक्षस गण का योग (Rakshas Gan Yog)

नक्षत्र मंडल में नक्षत्रों कि संख्या सत्ताईस (27) है और ये नक्षत्र राक्षस गण का योग बनाते हैं.  इनमें से किसी भी एक नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति राक्षस गण के अंतर्गत आते हैं.

  • अश्‍लेषा
  • विशाखा
  • कृत्तिका
  • मघा
  • ज्‍येष्‍ठा
  • मूल
  • धनिष्‍ठा
  • शतभिषा 

अश्लेषा-

 अश्लेषा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक राक्षस गण में आते हैं .यह  नक्षत्र नौवाँ नक्षत्र है. इस नक्षत्र का स्वामी बुध है. इन नक्षत्र में जन्म लेने वालों पर बुध व चंद्र का प्रभाव पड़ता है. बुध ज्ञान का कारक है, सफल व्यापारी, उत्तम पढ़ा-लिखा, ज्योतिष ज्ञाता, सफल व्यापारी, पराक्रमी धन कुटुंब से भी लाभान्वित होगा.

विशाखा-

 विशाखा नक्षत्र में जन्मा जातक राक्षस गण में आते हैं. नक्षत्र मंडल का सोलवाहं नक्षत्र है. इसका स्वामी गुरु होता है इस नक्षत्र में जन्मे जातक प्रभावशाली वक्ता ,.व्यावहारिक ज्ञान विज्ञान में रूचि रखने वाला न्यायप्रिय और साहसिक कार्यों में निपुण होता हैं. पद प्रतिष्ठा  सभी तरह के भौतिक सुख मिलते हैं.  

ज्येष्ठा –

ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातक राक्षस गण में आते हैं. ज्येष्ठा  अठारहवां नक्षत्र है ऐसी मान्यता है  यह नक्षत्र का स्वामी है ज्येष्ठा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने से जातक अपनी आयु से पूर्व ही परिपक्व हो जाता है.  और उत्तम चरित्र रखता है और प्रतिष्ठत पदों को पाता है.

मूल-

 मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग राक्षस गण के अन्तेर्गत आते हैं . इसका नक्षत्र मंडल में उन्नीसवां  स्थान है. इस नक्षत्र के जातक पर केतु और गुरु का असर जीवन भर रहता है, यह विचारों पर अडिग रहतें हैं .

मघा –

 मघा नक्षत्र में जन्म लेने वालों का गण राक्षस गण  है. यह दसवा नक्षत्र है इसका स्वामी केतु है .इसमे जन्में जातक को लगभग सभी भौतिक सुख की प्राप्ति होती है .ये उच्च पद के अधिकारी होते हैं .

कृतिका-

कृतिका नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक राक्षस गण में आते हैं. यह नक्षत्र मंडल का तीसरा नक्षत्र है .इसका स्वामी सूर्य है. इस नक्षत्र के व्यक्ति विद्वान ,इमानदार ,दयालु सामाजिक कामों मे रूचि लेनें वाला होता है .

धनिष्ठा-

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातक राक्षस गण के सदस्य होते हैं .इसका स्थान नक्षत्र मंडल में  तेईसवां नक्षत्र है. इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है. इस नक्षत्र मे जन्में लोगों पर हमेशा मंगल और शनि का प्रभाव रहता है .ये बहुमुखी प्रतिभा समपन्न होतें हैं . ये कुशल योजनाकार होतें हैं .

शतभिषा –

 शतभिषा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक राक्षस गण में आते हैं. यह नक्षत्र मंडल में  चौबीसवां नक्षत्र है इसका स्वामी  राहू है. इसमे जन्म लेने वाले जातक आत्म विश्वास से लबरेज़  रहते हैं .इनका आध्यात्मिक ज्ञान उच्चतम होता है.

सफलता और अहम का मिश्रण है राक्षस योनि

मनुष्य के जन्म को मानव योनि कहा जाता है. प्राचीन काल में जो राक्षसों के मूल स्वाभाव को चरितार्थ करते थे उसे राक्षस योनि कहते थे. राक्षस गण के ज्यादातर गुण और स्वाभाव राक्षस योनि के हैं .पौराणिक ग्रंथों में राक्षस योनि की तपस्या,स्वाभाव और व्यवहार की चर्चा है. 

राक्षस गण का गुण मिलान

ज्योतिष में व्यक्ति के भविष्य के विश्लेषण और विवाह के लिए जन्मकुंडली में गण का मिलान करना अत्यंत आवश्यक होता है. गण के आधार पर लड़का  और लड़की को अंक दिए जाते हैं.यही मिलान विवाह की योग्यता होता है. और विवाह सुख शांति के लिए भूमिका और महत्व का आधार होता है. गण समान होते हैं तो विवाह उत्तम होता है. अगर गण विपरीत हों  और अंक का मिलान कम से कम हो तो विवाह अशुभ होता है. अगर गण बिल्कुल विपरीत हो और अंक मिलन शुन्य हो तो विवाह विनाशकारी अर्थात अत्यंत अशुभ होता है. ऐसे विवाह को किसी परिस्थिति में नहीं करना चाहिए .