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Rahu Beej Mantra | भयानक दृष्टि से बचें | Benefits| जाप विधि

STOTRA

राहु बीज मंत्र राहू की कुदृष्टि को दूर करने का सबसे कारगर उपाय माना जाता है

राहू की क्रोधयुक्त दृष्टि-

यदि राहु की दृष्टि शुभ ना हो तो इंसान को अनचाहे संकटों से निकलना अत्यंत मुश्किल हो जाता है. कहा जाता है की राहु की क्रूर दृष्टि यदि व्यक्ति पर लगातार पड़ती रहे तो व्यक्ति को भयानक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और उसके decisions अर्थात निर्णय गलत होने लग जाते हैं. मतलब रहू की क्रूर दृष्टि के कारण व्यक्ति को सही गलत दिखाई देता है और गलत सही. परिणामस्वरुप होता यह है कि व्यक्ति स्वयं ही अपना शत्रु बन जाता है.

अतः जातक को अपनी कुंडली के आधार पर ज्योतिषी से सलाह मशवरा करना चाहिए और रहू की दृष्टि का पता लगाना चाहिए| इसके अतिरिक्त राहु की अशुभ दशा आने से पूर्व ही उससे बचने के साधन करने चाहिए. दोस्तों इस पोस्ट में हम आपको राहु की क्रूर दृष्टि से बचने के कुछ अचूक उपायों के विषय में बताएँगे जिनमें एक है rahu beej mantra. इस मंत्र के वारे में विस्तार से जानने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें. आगे इसकी पूरी जानकारी दी हुई है .

Rahu Ke Upay-

  • जैसा कि हमने पहले ही बताया है कि राहु के वैदिक मंत्र ‘ॐ रां राहवे नमः‘ का प्रतिदिन 108 बार जाप राहू के दुष्प्रभाव को कम करने का सबसे कारगर उपाय है.
  • राहु के बीज बीज मन्त्र ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:’ का 108 बार जाप भी राहू के दुष्प्रभाव को कम करने का एक अच्छा उपाय है.
  • एक अन्य उपाय की बात की जाये तो दुर्गा सप्तशती के अर्गला, कीलक और कवच का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी रहता है.
  • इसके अतिरिक्त दुर्गा चालीसा का पाठ करना भी काफी लाभकारी सिद्ध होता है.
  • रोजाना पक्षियों को खासकर कबूतरों को मकई का दाना खिलाना भी राहू के दुष्प्रभाव को कम करता है.

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Rahu Beej Mantra Benefits- राहू के बीज मंत्र के अनेकों लाभ हैं-

  • राहु मंत्र के जप की सलाह उन लोगों को दी जाती है जिनकी शादी करने में अत्यधिक अडचनें आ रही हों। यह आपके विवाह के मार्ग में आने वाली सभी परेशानियों को मिटा देता है।
  • सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए राहु मंत्र का जाप किया जाता है.यहां तक कि अगर आपकी सामाजिक साख को किसी तरह से नुकसान पहुंचाया गया है, तो इसे राहु का ध्यान करने और बीज मंत्र का जप करने के कुछ दिनों के भीतर वापस प्राप्त किया जा सकता है.
  • नियमित रूप से राहु मंत्र का जाप करने से आपका मानसिक चक्र (थर्ड आई) खुल सकती है जो आपको मानसिक हमलों से भी बचा सकता है.
  • यदि आपको लगता है कि आप, या आपके कोई प्रियजन, काले जादू के शिकार हैं, तो राहू बीज मंत्र का निरंतर जाप आपको ऐसी स्थिति से बचने में काफी मदद कर सकता है.
  • बहुत सारे राजनेता हैं जो राहु बीज मंत्र का उपयोग उस स्थिति को प्राप्त करने के लिए करते हैं जो वे अपने दिमाग में कल्पना करते रहे हैं. यह उन्हें एक समय में एक चीज पर अपना ध्यान केंद्रित रखने में मदद करता है.
  • राहु बीज मंत्र का जाप करने का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि आप अपनी, और किसी की भी, सभी प्रकार की बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा कर सकते हैं. यह आपकी आभा को मजबूत बनाता है, क्योंकि यह आपको ब्रह्मांड की ऊर्जा से जोड़ता है.

राहु मंत्र का जाप कब करें?

किसी भी जातक को जब राहु का जाप करना हो तो उसके लिए कृष्ण पक्ष शुक्ल पक्ष दोनों ही पक्षों में इस जाप प्रारंभ किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए शनिवार, रविवार अथवा बुधवार के दिन ही श्रेष्ठ रहते हैं तथा इन में से किसी दिन राहू बीज मंत्र का जाप करना चाहिए .

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राहु मंत्र का जाप क्यों और किसे करना चाहिए?

राहु मंत्र का जाप जातक की कुंडली में अगर कालसर्प दोष हो अथवा राहु वक्री दृष्टि से किसी ग्रह को देख रहा हो व कुंडली में वक्री रूप से विराजमान हो तो कालसर्प दोष का जाप करना चाहिए. इस जाप को वैदिक ब्राह्मणों के द्वारा कराना चाहिए। ऐसे ब्राह्मण त्रिकाल संध्या व गायत्री का जप करते हो.

राहु मंत्र जप विधि

इस बीज मंत्र का जाप करने के लिए सर्वप्रथम गणेशगौरी  व कलश का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए .उसके बाद भगवान शिव का रुद्राभिषेक करके ब्राह्मणों का तिलक पूजन कर जाप  का संकल्प  देकर ब्राह्मणों द्वारा कराना चाहिए.

इस जप को 18000 बार करने में 5 घंटे अथवा चतुर गुना करने पर 3 दिन लगते हैं.

राहू बीज मंत्र की जाप  संख्या 18000 तथा कलयुग में चर्तुगुणा है.

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Rahu Beej Mantra in Hindi

ऊं रां राहवे नमः

Rahu Beej Mantra in English

Om rang rahave namah

राहु मंत्र का जाप किस माला द्वारा करें?

इस जाप को  करने में उत्तम फल की प्राप्ति के लिए रुद्राक्ष की माला से ही जप करना चाहिए.

राहुस्तोत्रम्

अस्य श्रीराहुस्तोत्रस्य वामदेव ऋषिः गायत्री छन्दः राहुर्देवता राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः

राहुर्दानव मन्त्री च सिंहिकाचित्तनन्दनः । अर्धकायः सदाक्रोधी चन्द्रादित्यविमर्दनः ॥ १ ॥

रौद्रो रुद्रप्रियो दैत्यः स्वर्भानुर्भानुमीतिदः । ग्रहराजः सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुकः ॥ २ ॥

कालदृष्टिः कालरुपः श्रीकष्ठह्रदयाश्रयः । विधुंतुदः सैंहिकेयो घोररुपो महाबलः ॥ ३ ॥

ग्रहपीडाकरो द्रंष्टी रक्तनेत्रो महोदरः । पञ्चविंशति नामानि स्मृत्वा राहुं सदा नरः ॥ ४ ॥

यः पठेन्महती पीडा तस्य नश्यति केवलम् । विरोग्यं पुत्रमतुलां श्रियं धान्यं पशूंस्तथा ॥ ५ ॥

ददाति राहुस्तस्मै यः पठते स्तोत्रमुत्तमम् । सततं पठते यस्तु जीवेद्वर्षशतं नरः ॥ ६ ॥ ॥

इति श्रीस्कन्दपुराणे राहुस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

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नोट- आपको कभी भी किसी भी स्तोत्र या धार्मिक पाठ के अंत में समाप्त शब्द का प्रयोग नहीं करना है: सदैव ॐ तत्सत बोलना है. हमने यहाँ पर संपूर्णम शब्द इसलिए लिखा है ताकि पाठकों को बता सकें कि यहाँ पैर शब्द पूर्ण हुए.

आशा करता हूं आज मेरे द्वारा दी गई यह समस्त जानकारी आप सबको पसंद आई होगी. इसके द्वारा आप सभी राहु के विषय में जानकर अपने अपने पुण्य कर्म अर्जित करेंगे.

जय श्री राधे