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Kamakhya Devi Mandir | Story | 51 शक्ति पीठों मे से एक

Secrets Story

Kamakhya Temple के योनि कुण्ड की पूजा एवं आराधना कर के अघोरी साधु अपनी शक्तियों को बढ़ाते हैं. Kamalhya devi mandir हिंदू धर्म के 51 शक्ति पीठों  में से एक है.

आज हम आप के साथ इस शक्तिपीठ के रहस्य (Kamakhya Yoni Mystery)पर चर्चा करेंगे.   और इस मंदिर के इतिहास या kamakhya temple history in hindi  भी बतायेंगे.

असम की राजधानी दिसपुर से जुड़ा एक शहर है गुवाहाटी उसके 8 किलोमीटर दूर एक कामाख्या नाम का शहर स्थित है. साल भर में एक बार दुनिया भर से तांत्रिक और अघोरी साधू यहाँ आ कर (Kamakhya Temple History) इकट्ठा होते हैं. कामाख्या मंदिर (Kamakhya Mandir)  ऐसी मान्यता है की यहाँ के तांत्रिक दुष्ट शक्तियों का सामना करने में और उन्हें दूर करने में सक्षम होते हैं.

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Kamakhya Devi Story

पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी सती (Kamakhya Temple History) के पिता दक्ष ने एक महान का आयोजन किया परन्तु उस यज्ञ में भगवान शंकर अर्थात माता के के पति ने उन्हें वहां जाने से मन किया. इसी बात पर भगवान् शिव जो की त्रिकाल दर्शी हैं उनमें तथा माता में बहस हुई और देवी माँ अकेली ही उस यज्ञ में चली गई थीं. वहां पहुँचने पर उनके पिता दक्ष ने भगवान शिव का अत्यधिक अपमान किया. देवी सती अपने पिता दक्ष के द्वारा अपने पति भगवान शिव को उचित सम्मान ना देने के कारण इतनी आहत हुईं की उन्होंने हवन की अग्नि में समा कर अपने प्राण त्याग दिया.

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जब महादेव को यह बात पता चली तो भगवान शिव देवी सती का जलता हुआ शव लेकर तांडव नृत्य करने लगे और जहाँ भी उनकी तीसरी दृष्टि जाती ब्रह्मांड का वह हिस्सा नष्ट हो जाता. जब नारायण जी ने ये देखा तो उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के जलते हुए शव के 108 टुकड़े कर दिये और जहाँ भी ये टुकड़े गिरे वह स्थान शक्ति पीठ बन गया.

माता सती का योनि और गर्भ जिस भाग में गिरे वह भाग आज कामाख्या के नाम से जाना जाता है. इसके अलावा एक कहानी ये भी है की यही वह जगह है जहाँ भगवान शिव और माता सती पहली बार मिले थे इसलिये इसका नाम कामाख्या पड़ा जिसके शुरू मे काम शब्द है जिसका अर्थ प्रेम है.

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Kamakhya temple –

मान्यता ये है कि कामाख्या सिद्धपीठ पर सभी की मनोकामनायें पूर्ण होती हैं . इसीलिए इस शक्ति पीठ को कामाख्या के नाम से जाना जाता है.

आश्चर्यचकित करने वाली बात है कि इस मंदिर में माता की कोई मूर्ति नहीं है. इस मंदिर में देवी के योनि भाग की ही पूजा की जाती है.

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विश्व में कुल 51 शक्ति पीठ हैं जिसमें से एक है kamakhya shakti peeth  हिंदू धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार जब माता सती के जलते हुए अंग पृथ्वी पर जगह-जगह गिरे थे वे सभी जगह आज शक्ति पीठ के नाम से जानी जाती हैं. Kamakhya Devi mandir  नीलांचल पर्वत के बीच मे स्थित है जो कि  असम के गुवाहाटी शहर से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह मंदिर तोड़ दिया गया था पर इस मंदिर का  पुनः निर्माण बिहार के राजा नर नारायण ने सत्रहवीं शताब्दी में करवाया.

KAMAKHYA TEMPLE HISTORY HELLOZINDGI

KAMAKHYA TEMPLE HISTORY

Kamakhya Temple History in Hindi 

ऐसा माना जाता है कि  कामाख्या देवी मंदिर को 16 वीं शताब्दी में महाराज विश्व सिंह जी ने बनवाया था. ऐसा करने के लिए महाराजा जी को एक बुज़ुर्ग स्त्री ने कहा था. जिनकी बात मान कर राजा ने यहाँ खुदाई शुरू करवाई और मंदिर का ऊपर वाला हिस्सा सामने आया. राजा ने इस मंदिर की नींव रखी। इतिहासकारों का ऐसा मानना है की बाद में ये मंदिर किसी लड़ाई के कारण टूट गया.

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अत्यधिक हैरान करने वाली बात है-

कोई भी व्यक्ति इ बात को जानकार हैरान रह जाऐगा कि जून महीने के दौरान माता सती अपने मासिक धर्म के चक्र में होती हैं. ऐसा देखने को मिलता है कि जून माह के दौरान यहां स्थित ब्रह्मपुत्र नदी लाल रंग की हो जाती है.

इस समय के दौरान अर्थात जून माह में मंदिर (Kamakhya Devi Temple) 3 दिन के लिए बंद रखा जाता है . मंदिर (Kamakhya Temple History) से निकलने वाले लाल रंग के पानी को मंदिर में आने वाले भक्तों में बांट दिया जाता है.

प्रसाद के रूप में दिया जाता है लाल रंग का कपड़ा

जिस प्रकार इस मंदिर की मान्यता अन्य मंदिरों से अलग है उसी प्रकार यहाँ का प्रसाद भी अलग ही है. प्रसाद स्वरुप यहाँ लाल रंग के कपडे की एक चीर दी जाती है जो गीली होती है.

मान्यता है कि जब माता तीन दिन रजस्वला रहती हैं तो सफेद रंग का वस्त्र  मंदिर के अंदर बिछाया जाता है . जब मंदिर के कपाट तीन दिन के बाद खोले जाते हैं, तो वस्त्र माता के रज के कारण लाल एवं गीला होता है. इस वस्त्र को अम्बुवाची नाम से जानते हैं. इसी वस्त्र को भक्तों को प्रसाद रूप में वितरित किया जाता है.

इसलिए प्रसिद्ध है कामख्या देवी मंदिर

Kamakhya Devi Temple विशेषकर तंत्र एवं मंत्र साधना के लिए विश्व में सबसे प्रसिद्ध स्थान है. कामख्या देवी मंदिर में अघोरियों एवं साधुओं का जमावड़ा ही रहता है. यह स्थान काले जादू के लिए भी विख्यात है . ऐसा कहा जाता है की या तो किसी पर काला जादू कर दिया गया हो या फिर कसी को काले जादू से निजात पानी हो तो यहां इस समस्या से छुटकारा पाने के सभी साधन व विद्वान् मिल जाते हैं. कामाख्या मंदिर के साधु एवं तांत्रिक चमत्कारों के विशेषज्ञ माने जाते हैं.

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बलि प्रथा आज भी है प्रचलित-

कामख्या देवी मंदिर में आज भी पशुओं की बलि देने की प्रथा है . हालांकि यहां सिर्फ नर पशुओं की ही बलि दी जाती है.

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क्योंकि कामख्या देवी मंदिर में देवी  की कोई भी प्रतिमा (Kamakhya Yoni Mystery) नहीं है. मंदिर में  एक स्थान पर एक चट्टान के मध्य बना विभाजन माता सती की योनि को दिखलाता है  यहाँ एक प्रकर्ति प्रदत्त झरने की वजह से यह स्थान सदैव गीला ही रहता है.

इस झरने के पानी को काफी लाभकारी माना जाता है. कहा जाता है कि  इस झरने के प्रतिदिन सेवन से आप किसी भी खतरनाक से खतरनाक बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं.

Best time to visit Kamakhya Temple- मई, जून और जुलाई इन महीनों में छुट्टी होने के कारण भीड़ बहुत अधिक रहती है। जिन महीनों में गर्मी या सर्दी की छुट्टियाँ में भीड़ बढ़ जाती है इसलिए श्रद्धालु इस समय ना जा के अन्य त्योहार जैसे अगस्त के आखिरी के कुछ दिनों में मांस देवी की पूजा रखी जाती है जिसमें मंदिर रात भी खुला रहता है इस समय जाएं.

Kamalhya Temple Darshan Timing – Kamakhya devi mandir  जाने का सबसे अच्छा समय सुबह 5 बजे होता है. मंदिर का दरवाजा 6 बजे के करीब खुलता है अगर आप भीड़ से बचना चाहतें हैं तो 5 बजे से पहले जाइये और शाम के समय 3 बजे से पहले लाइन लगाइये. ऐसा करने से आपको जल्द ही दर्शन मिल जायेंगे.

Guwahati railway station to kamakhya temple distance – गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से kamakhya devi mandir की दूरी लगभग 7-8 km की है.

Kamakhya sindoor – अभिमंत्रित किया हुआ कामाख्या सिंदूर आकर्षण बढ़ाने और वशीभूत करने के काम आता है. इसका प्रयोग अदालतों में केस जितने और दुश्मनों से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है. इसे अलावा सिद्ध कामाख्या सिंदूर बुरी नज़र से बचने अथवा भूत बाधा को दूर करने के काम आता है. इसके अलावा कामाख्या सिंदूर को मनचाही इच्छा की पूर्ति के लिए भी किया जाता है.

How to Reach Kamkhya Temple – kamakhya devi temple से 20 किमी के दूरी पर गुवाहाटी हवाई अड्डा है जहाँ से मुंबई, चेन्नई, कोलकाता आदि बड़े शहरों से हवाई जहाज है। कामाख्या शहर में कामाख्या रेलवे स्टेशन जहाँ श्रद्धालु जहाँ रेल गाड़ी के माध्यम से आ सकते हैं और मंदिर तक आटो या टैक्सी ले सकते हैं या फिर यात्री असम टूरिज्म की बसें स्टेशन से मंदिर तक पहुँचा देंगी.

आशा करता हूँ आज कि यह लेख आपको कामाख्या देवी मंदिर से जुड़ी सारी जानकारी देने में सक्षम रहा होगा .ऐसे ही लेखों के लिए हमारे वेबसाइट hellozindgi.com से जुड़े रहें.