वास्तु के अनुसार रसोईघर | Location | Colour | Tips | जरूर जानें 

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 वास्तु के अनुसार रसोईघर जो कि व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं धन-सम्पदा दोनो को प्रभावित करता है। अतः वास्तुशास्त्र के अनुसार ही रसोईघर बनाना चाहिए।Vastu Tips For Kitchen भी यहाँ देखें.

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किचिन (रसोई) के लिए वास्तु इन हिंदी (Vastu for Kitchen)

मनुष्य की सबसे बड़ी जरूरतों में भोजन अनिवार्य है. क्योंकि भोजन प्राणी की ऊर्जा, स्वास्थ्य, ख़ुशी और जीवन का आधार है. घर में जिस जगह भोजन तैयार किया जाता है उस स्थान को किचिन (रसोईघर) कहते हैं .

वास्तु शास्त्र प्राचीन भारतीय शास्त्र (विज्ञान) है वास्तुशास्त्र का उद्देश्य मात्र यह है कि मनुष्य जहाँ रहे वहां स्वस्थ, प्रसन्न व सुखी रहे तथा उसके आस पास सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर संचार होता रहे. जिससे वह खुद को ऊर्जावान महसूस करे. जब व्यक्ति खुद को ऊर्जावान महसूस करता है तो उसमें कार्य करने की क्षमता बढ जाती है. कार्य क्षमता बढ़ने से धन का आगमन तेज हो जाता है. जिससे समाज में व्यक्ति का  मान, सम्मान और प्रतिष्ठा बढती  है.

रसोई बनाने के लिए वास्तु शास्त्र (Vastu Of Kitchen In Hindi)में बहुत नियम हैं .आपके जीवन को बेहतर बनाने के लिए उनका पालन करना आवश्यक है. ये हैं प्रमुख नियम

  1. टॉयलेट के ऊपर और नीचे रसोई न बनाएँ।
  2. रसोई को बेडरूम के ऊपर व् नीचे नहीं बनाना चाहिए |
  3. रसोई में चूल्हा किचिन के दरवाज़े के सामने कभी न रखें । 
  4. किचिन का दरवाजा कोने में नहीं होना चाहिए ।  
  5. किचिन ईशान कोण में नहीं होना चाहिए । ऐसा होने पर परिवार में मानसिक तनाव रहता है।
  6. दक्षिण पश्चिम दिशा में रसोई होने पर घरवालों में झगड़े होते है।
  7. उत्तर दिशा कुबेर भगवान की दिशा है। इस दिशा में किचिन नहीं होना चाहिए अगर ऐसा होता है तो परिवार में खर्चे बढ़ जाते है।
  8. रसोई में काले रंग का पत्थर नहीं लगवाना चाहिए | 
  9. किचिन के वास्तु दोष के निवारण के लिए रसोई के दरवाजे पर लाल रंग का क्रिस्टल यूज करना चाहिए |
  10. रसोई में फ्रिज को उत्तर दक्षिण में रखना चाहिए |
  11. किचिन में दवा नहीं रखनी चाहिए |
  12. रसोईघर में पूजा घर नहीं होना चाहिए |
  13. किचिन में खाना बनाते समय खाना बनाने वाले का मुख पश्चिम नहीं होना चाहिए | 

वास्तु के हिसाब से किचिन की सबसे अच्छी लोकेशन और डायरेक्शन

किचिन (रसोई) मतलब सिर्फ दीवार और कुछ खांचे नहीं  बल्कि भगवान् के भोग और मनुष्य की बल, विवेक, प्यार और प्रसन्नता के निर्माण का स्थान है.  इतने पवित्र और ऊर्जादायी स्थान को वास्तु के अनुसार बनाना अति आवश्यक है. तो हम बतायेंगे कुछ टिप्स(Vastu Kitchen Tips) जो किचन को बेहद आकर्षक,ऊर्जादायक और परिपूर्ण बनाते हैं. जो आपके परिवार के स्वास्थ्य और सफलता में  पूरी सहायक होगी.

किचिन (रसोईघर) ऐसी जगह है जहाँ विरोधाभासी चीजों को एक जगह रखा जाता है जैसे पानी और अग्नि , दूध और नमक, खट्टा और मीठा और कड़वा और मसाला | इसलिए  यहाँ पर वस्तुओं और तत्वों का स्थान सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए किचिन के निर्माण के समय वास्तु का ध्यान रखना आवश्यक है. 

वास्तु के अनुसार किचन की दिशा (Vastu Kitchen Direction)

ऊर्जादायक और बेहतरीन किचिन के लिए घर में सबसे आदर्श स्थान दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-दक्षिण-पूर्व और दक्षिण होता है. यह दिशा रसोई की गतिविधियों में सकारात्मकता बढाती है जो घर में रहने वाले परिवार के लिए अच्छे परिणाम देता है और प्रसन्नता को बढाने वाला होता है.अगर ऐसा संभव न हो तो रसोई को पूर्व में बनाना चाहिए या फिर वायव्य कोण में बनाना चाहिए. 

वास्तु के अनुसार गैस चूल्हा की दिशा

वास्तु शास्र के हिसाब से अग्नि तत्व की ऊर्जा के बेहतर उपयोग के लिए किचिन को आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) कोण में बनाना चाहिए. लेकिन इसके साथ शर्त यह है कि चूल्हा पूर्व या आग्नेय कोण में रखा होना चाहिए. 

वास्तु के अनुसार किस ओर रखें दालें व मिर्च मसाले

किचिन में मुख्य रूप से अग्नि का उपयोग होता है यह ऊर्जा की सूचक है जिसके माध्यम से भोजन पकाया जाता है. भोजन स्वास्थय और प्रसन्नता को बढ़ने वाला होता है. रसोईघर में दालों के डिब्बे ,चीनी, मिर्च, मसालें और नमक के डिब्बों को दक्षिण या पश्चिम में रखना चाहिए.

वास्तु के अनुसार रसोईघर में  पानी का स्थान

किचिन में चूल्हा हमेशा दक्षिण- पूर्व दिशा में रखना चाहिए. रसोईघर में ड्रिंकिंग वाटर को हमेशा उत्तर दिशा या फिर ईशान कोण में रखना चाहिए | 

वास्तु के अनुसार रसोई की खिड़की कहाँ निकालें

किचिन में खिड़कियाँ बड़ी होनी चाहिए | विंडो हमेशा पश्चिम और पूर्व की दीवारों में ही निकालनी चाहिए | 

वास्तु के अनुसार रसोईघर में पंखे व डाइनिंग टेबल की दिशा

एग्जॉस्ट फैन भी दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवार पर लगवाना चाहिए . रसोई की उत्तर पश्चिम या पश्चिम दिशा में डाइनिंग टेबल रख सकते है.पूर्व और उत्तर में हल्की चीज़ें रखनी चाहिए .रसोई घर को रात के समय हमेशा रसोई साफ़ रखे. किचिन में सोने से पहले झूठे बर्तन जरुर साफ़ करने चाहिए. 

वास्तु के अनुसार किचन का रंग (Vastu For Kitchen Colour)

रंगों का जीवन में बहुत ही महत्व है. रंग उत्साह, ऊर्जा ,उमंग प्रसन्नता के प्रतीक होते हैं जो व्यक्ति के जीवन को महकाते हैं . रसोई घर के लिए तो यह और भी आवश्यक हो जाते हैं. क्योंकि खाना बनाते समय खाना बनाने वाला का मूड अच्छा हो जिससे वह बेहतर और स्वादिष्ट खाना बना सके, तो आइये जानते हैं कौन सा रंग बेहतर है किचिन के लिए –

  1. अग्नि का रंग लाल होता है । इसलिए लाल रंग किचिन के लिए उत्तम होता है। लाल रंग के विकल्प के तौर पर ऑरेंज/ नारंगी का चुनाव कर सकते हैं 
  2. रसोई में अच्छी रौशनी के लिए ब्राउन कलर बेहतर है तो ऑटम ऑरेंज अच्छा विकल्प रहेगा . क्योंकि यह ब्राउन शेड के साथ आकर्षक लगता है यह किचिन को उजाले से भर देते हैं ग्रे कलर भी उपयुक्त है.
  3. किचिन की बैक साइड दीवार पर आसमानी रंग के साथ ग्रे कलर के और अन्य  विकल्प भी आकर्षक और बेहतर लगते है.
  4. एनर्जेटिक फीलिंग के लिए रेनबो कलर भी बहुत अच्छा होता है.
  5. किचिन की दीवारों पर कभी काला रंग नहीं करना चाहिए.

वास्तु के अनुसार रसोईघर की स्थिति (Vastu Kitchen Direction)

ड्रिंकिंग वाटर , टेप , सिंक और वाश बेसिन कंटेनर कनस्तर, अलमारियां और समान रखने को स्लिप् पश्चिम या फिर दक्षिण में बना सकते हैं.  

कबिनेट के लिए रंग

 किचिन में आप अगर स्लैब / कैबिनेट को लाल रंग नही देना चाहते हैं. तो हरा और हल्का पीला रंग दोनों विकल्प आपके सामने है जो आपकी किचिन को बेहद आकर्षक और मनमोहक बनाते हैं.

वास्तु शास्त्र के अनुसार सिंक Vastu for Kitchen Sink

किचिन में खाना बनाते समय और खाना के बाद झूठे बर्तनों को अक्सर सिंक में रखकर साफ़ किया जाता है जिससे सिंक में गन्दा पानी इकठ्ठा हो जाता है, इसलिए सिंक की दिशा और गंदे गंदे पानी के बहाव की दिशा बहुत आवश्यक है सिंक को उचित स्थान और दिशा में लगाने से किचिन साफ़ रहती है और आकर्षक दिखती है.  

  1. बर्तन धोने वाला वाश बेसिन/ सिंक उत्तर पश्चिम दिशा में होना चाहिए.
  2. चूल्हा और बर्तन धोने का सिंक एक ही प्लेटफॉर्म में नहीं होना चाहिए.
  3. रसोई में पानी की लीकेज होने पर तुरंत ही रिपेयरिंग करवाना चाहिए .

वास्तु के अनुसार उत्तर-पश्चिम रसोई

वास्तु के अनुसार उत्तर- पश्चिम कि दिशा का सम्बन्ध बैंकिंग और समर्थन के क्षेत्र से है. इसलिए, जब इस क्षेत्र में वास्तु के अनुसार किचिन बनाना चाहिए. उत्तर-पश्चिम दिशा में रसोई निश्चित रूप से बहुत अनुकूल है. 

  1.  इससे  पारवारिक सदस्यों को हमेशा अपने ज्ञात लोगों का समर्थन हासिल होता है जब उन्हें समर्थन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है.
  2. ऐसी किचिन होने पर घर की महिलाओं का स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहता है.

रसोई के लिए वास्तु शास्त्र (H3)

रसोई बनाने के लिए वास्तु शास्त्र में बहुत नियम है आपके जीवन को बेहतर बनाने के लिए उनका पालन करना आवश्यक है ये है प्रमुख नियम 

  • रसोई घर की दक्षिण पूर्व दिशा में अत्यंत शुभ है।
  • टॉयलेट के ऊपर और नीचे रसोई न बनाएँ।
  • रसोई को बेडरूम के ऊपर व् नीचे न बनाना चाहिए |
  • रसोई में चूल्हा किचिन के दरवाज़े के सामने कभी न रखे। 
  • किचिन का दरवाजा कोने में नही होना चाहिए ।  
  • किचिन इशान कोण न हो। ऐसा होने पर परिवार में मानसिक तनाव रहता है।
  • दक्षिण पश्चिम दिशा में रसोई होने पर घरवालों में झगड़े होते है।
  • उतर दिशा कुबेर भगवान की दिशा है। इस दिशा में किचिन नही होना चाहिए अगर ऐसा होता है तो परिवार में खर्चे बढ़ जाते है।
  • रसोई में काले रंग का पत्थर नही लगवाना चाहिए | 
  • किचिन के वास्तु दोष के निवारण के लिए रसोई के दरवाजे पर लाल रंग का क्रिस्टल यूज करना चाहिए | 
  • रसोई में फ्रिज को उत्तर दक्षिण में रखना चाहिए |
  • किचिन में दवा नही रखनी चाहिए |
  • रसोईघर में पूजा घर नही होना चाहिए |
  • किचिन में खाना बनाते समय खाना बनाने वाले का मुख पश्चिम नही होना चाहिए | 

Vastu for Kitchen in East Facing House H2

ईस्ट फेसिंग हाउस में किचन निर्माण–H3

पूर्व मुखी घर में किचन का निर्माण करने के लिए आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) बहुत ही अच्छा स्थान है. किसी कारण से यह स्थान उपलब्ध नही है तो अग्नि तत्व से सम्बन्ध रखने वाली दिशा दक्षिण-दक्षिण-पूर्व (दक्षिणी-आग्नेय) में रसोईघर  को आराम से बना सकते हैं . इस जगह पर निर्मित किचिन व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाती है.

Vastu kitchen in South facing house H2

वास्तु के अनुसार साउथ फेसिंग घर में रसोई H3)

वास्तु के अनुसार अग्नि की दिशा दक्षिण है. साउथ फेसिंग हाउस में इस डायरेक्शन में किचिन बड़े आराम से बन सकती है.लेकिन ऐसा संभव न होने पर आग्नेय दिशा (दक्षिण-पूर्व)की रसोई भी साकारात्मक परिणाम देती है . यह दिशा भी बहुत उत्तम मानी  जाती है. इसके अलावा वायव्य कोण में भी किचिन बना सकते है.लेकिन रसोई घर में काम करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए 

  • 1-आग्नेय कोण में निर्मित रसोई में खाना बनाते वक्त अपना मुख हमेशा पूर्व में ही रखें | 
  • 2- ऐसी स्थिति में चूल्हा का मुख आग्नेय अथवा वायव्य कोण की ओर रहना चाहिए . 

Vastu Kitchen in North West

वास्तु के अनुसार नार्थ वेस्ट किचन

किचिन के लिए दक्षिण और पूर्व दिशा तो सर्वश्रेष्ठ दिशा है. घर अगर उत्तर-पशिम मुखी है तो रसोईघर दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा और उत्तर-पूर्व में होनी चाहिए. अगर यह स्थान किसी कारण वश खाली नहीं  है तो किचिन ईशान,वायव्य और आग्नेय दिशा में भी किचिन (रसोई घर) बना सकते हैं.

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर की उत्तम दिशा which direction is best for kitchen

उर्जादायक और बेहतरीन किचिन के लिए घर में सबसे आदर्श स्थान दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-दक्षिण-पूर्व और दक्षिण होता है। यह दिशा रसोई की गतिविधियों में सकारात्मकता बढाती  है जो घर में रहने वाले परिवार के लिए अच्छे परिणाम देता है और प्रसन्नता को बढाने वाला होता है |