Bhakt Shravan Kumar Story in Hindi | रोचक तथ्य | माता- पिता 

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इस पोस्ट में  आपको श्रवण कुमार का जीवन परिचय  दिया जा रहा है. Rhravan kumar story ko पढ़ें  क्योंकि यहाँ shravan kumar ki kahani in hindi प्रस्तुत है.

श्रवण कुमार का जीवन परिचय

साधारण चरित्र की असाधारण कहानी हिंदी में अनछुए पहलू और रोचक तथ्यों के साथ अद्भुत त्याग का बेमिसाल जीवन श्रवण कुमार का नाम हिन्दू धर्म में बेहद आस्था और सम्मान के साथ लिया जाता है और हर माता-पिता अपने लिए ऐसी संतान चाहते हैं लेकिन कोई भी संतान श्रवण कुमार के समकक्ष नही हो सकी | 

प्रभु श्री राम के जन्म से पहले का है श्रवण कुमार का जन्म

हिन्दू पौराणिक ग्रन्थ में श्रवण कुमार प्राथमिक चरित्र है। जो प्रभु श्री राम के जन्म से काफी पहले का है यह माता-पिता के प्रति अथाह आस्था का अनुपम चरित्र है इनके माता-पिता के प्रति समर्पण की बराबरी कोई पुत्र आज तक नही कर पाया है यह सदैव सबके लिए प्रेरणा स्रोत्र है 

माता पिता के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे श्रवण कुमार

अंधे होने के बाद भी दोनों ने श्रवण कुमार के लिए एक सुंदर युवती खोज कर विवाह किया. श्रवण कुमार ने होने वाली पत्नी से एक ही वचन माँगा कि मेरे साथ तुम्हें सारा जीवन जीना है तो मेरे साथ तुम्हें भी माँ बाप की सेवा का अवसर मिला है, लेकिन तुम मुझे चाहो या ना, मुझे कैसे भी रखो पर माता पिता की सेवा पूजा में कभी भी कोई कमी नहीं होनी चाहिए एवं उनके सम्मान में भी कभी कोई कमी नहीं होनी चाहिए.

Shravan Kumar in Hindi

Shravan Kumar Parents Name श्रवण कुमार के पिता शांतुनु एवं माता का नाम ज्ञान्वंती था. श्रवण कुमार के पिता शांतुनु  एक सिद्ध महात्मा थे. श्रवण कुमार की माता भी सिद्ध धर्म परायण स्त्री थीं. यह प्रसंग उस काल का है जब श्रवण कुमार के माता पिता शांतुनु और उनकी पत्नी दोनीं काफी वृद्ध हो चुके थे तथा उनकी नेत्र ज्योति भी चली गई थी . इन दोनों का श्रवण कुमार नामक एक पुत्र पैदा हुआ .

अत्यंत श्रद्धावान व्यक्ति थे श्रवण कुमार

श्रवण कुमार एक पौराणिक चरित्र है। ऐसा माना जाता है कि श्रवण कुमार के माता-पिता अंधे थे। श्रवण कुमार अत्यंत श्रद्धापूर्वक उनकी सेवा करते थे। एक बार उनके माता-पिता की इच्छा तीर्थयात्रा करने की हुई। श्रवण कुमार ने कांवर बनाई और उसमें दोनों को बैठाकर कंधे पर उठाए हुए यात्रा करने लगे। 

श्रवण कुमार के माता पिता की इक्षा

एक दिन श्रवण कुमार के माता पिता ने उनसे कहा – पुत्र श्रवण ! हम दोनों की आयु बहुत हो चुकी है. अब जीवन का कोई भरोसा नहीं है. किसी भी समय हमारी आँखे बंद हो सकती हैं. और उन्होंने चालीस तीर्थ स्थलों और पवित्र स्थानों की तीर्थयात्रा की इच्छा जाहिर की. श्रवण कुमार के माता पिता का विश्वास था कि इससे शुद्ध होती है. उन्होंने पूछा कि क्या तुम हमारी यह इच्छा पूरी कर सकते हो ? जब यह श्रवण कुमार ने सुना तो कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मैं आपकी सेवा करूँ .आप दोनों की यह इच्छा मैं अवश्य पूरी करूँगा . 

Shravan Kumar Story

आइये मित्रों अब हम Bhakt Shravan Kumar की रोचक एवं शिक्षाप्रद कहानी को ध्यान से पढ़ें.  जब श्रवण कुमार को अपने माता-पिता की 40 तीर्थ घूमने की इच्छा के बारे में पता लगा तो श्रवण कुमार उनकी इच्छा हर हाल में पूरा करने का मन बना लिया. उन्होंने माँ –बाप को तीर्थ यात्रा कराने का संकल्प लिया. उस समय यातायात के अत्यंत सीमित साधन थे.  और वो भी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं थे. श्रवण कुमार ने एक युक्ति सोची और उन्होंने अपने माता-पिता को टोकरी में बिठा कर घुमाने  का फैसला किया. उन्होंने बांस की एक कांवर बनायी और दोनों को श्रद्धा पूर्वक उसमें बिठाया.

एक दिन वे अयोध्या के समीप वन में पहुंचे। वहां रात्रि के समय माता-पिता को प्यास लगी। श्रवण कुमार पानी के लिए अपना तुंबा लेकर सरयू तट पर गए। उसी समय महाराज दशरथ भी शिकार करते हुए वहाँ पहुँच गए । श्रवण कुमार ने जब पानी में अपना तुंबा पानी में डुबोया, तो दशरथ जी ने समझा कि कोई हिरन जल पी रहा है। उन्होंने शब्दभेदी बाण छोड़ दिया। बाण श्रवण कुमार को लगा। 

जब रजा दशरथ ने निकट जा कर अपने शिकार को देखा तो उन्हें ज्ञात हुआ कि ये कोई हिरन नहीं बल्कि कोई युवक है तो वे अत्यंत दुखी हुए. उनको दुखी देख मरते हुए श्रवण कुमार ने कहा- मुझे अपनी मृत्यु का दु:ख नहीं, लकिन अपने माता-पिता के लिए मैं बहुत दुखी हूँ। आप जाकर उन्हें मेरी मृत्यु का समाचार सुना दें और जल पिलाकर उनकी प्यास शांत करें। इतना कहकर श्रवण कुमार ने अपने प्राण त्याग दिए. 

महाराजा दशरथ ने देखा कि श्रवण दिव्य रूप धारण कर विमान में बैठ कर बैकुंठ को जा रहे हैं।दुखी मन से महाराजा दशरथ श्रवण कुमार के पिता शांतुनु  एवं माता ज्ञान्वंती के समीप पहुंचे एवं उनको जल पिलाकर उनकी प्यास शांत की. जब माता पिता ने विलम्ब का कारण पूछा तो राजा दशरथ क्षमा याचना मांगते हुए सारा वृतांत सुना डाला. श्रवण कुमार के माता पिता बहुत जोर-जोर से विलाप करने लगते हैं, और उसी समय माता-पिता के कहने पर राजा दसरथ कावड़ उठाकर दोनों को श्रवण के मृत शरीर के पास ले गए. उनके विलाप को देख महाराज दशरथ को अत्यंत पश्चाताप हुआ और उन्होनें श्रवण कुमार के माता पिता से क्षमा याचना मांगी. 

श्रवण कुमार के माता पिता का महाराजा दशरथ को श्राप

श्रवण कुमार के दुखी पिता शांतुनु ने राजा दशरथ को श्राप दिया और कहा कि जिस तरह मैं शांतुनु, पुत्र वियोग में मर रहा हूँ, उसी प्रकार तुम भी पुत्र वियोग में मरोगे.  इतना कहकर दोनों माता- पिता अपने शरीर को त्याग मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. दुखी मन के साथ राजा दशरथ ने उन दोनों का अंतिम संस्कार किया.  

सच हुआ श्रवण कुमार के माता पिता का श्राप

कहा जाता है कि राजा दशरथ ने श्रवण कुमार के बूढ़े माँ-बाप से उनके बेटे को छीना था। इसीलिए राजा दशरथ को भी पुत्र वियोग सहना पड़ा. रामचंद्र जी चौदह साल के लिए वनवास को गए। राजा दशरथ यह वियोग नहीं सह पाए। इसीलिए उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।

Shravan Kumar Ke Mata Pita ka Naam

श्रवण कुमार के माता-पिता, शांतनु और ज्ञानवंती (मलया), साधु थे। वे दोनों अंधे थे।