आग्नेय कोण क्या है Agni Kon In Vastu Shastraमुख्यद्वार Sidhi में भूमिका

आग्नेय कोण क्या है | Agni Kon In Vastu Shastra|मुख्यद्वार Sidhi में भूमिका

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आग्नेय कोण हिंदी में,महत्व और गृह निर्माण में भूमिका

आग्नेय कोण क्या है ?आग्नेय कोण एक दिशा और वास्तु शास्त्र में इसका उचित प्रयोग बताया गया है जिससे व्यक्ति के जीवन में संतुलन, श्रेष्ठता, गर्व, प्रशंसा और सम्मान आता है जोकि हर व्यक्ति अपने जीवन में चाहता है . तो आइये जानते है कि आग्नेय कोण क्या है

जब दिशाओं के ज्ञान की बात आती है तो अधिकतर  लोगों को चार दिशाओं का ज्ञान होता है . लेकिन दिशाओं के बारे में यह आधा सच है क्योंकि दिशाएं दस दिशाएँ हैं और भवन निर्माण में तो दस दिशाओं का प्रयोग किया जाता है लेकिन दिशा ज्ञान न होने की वजह से उनका सही प्रयोग नही हो पाता है और लाभ के स्थान पर लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है और इस दिशा दोष का जल्दी कोई समाधान भी नही मिलता है .

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आग्नेय कोण क्या है ?

आग्नेय कोण एक दिशा है जो पूर्व दिशा और दक्षिण के मध्य स्थित दिशा है जिसे वास्तु शास्त्र में आग्नेय दिशा कहते हैं . इस दिशा का मूल तत्व अग्नि होता है पज्यादातर इस दिशा को गर्म दिशा भी कहते हैं . इस दिशा का स्वामी गृह शुक्र होता है . इसलिए इस दिशा वाले स्थान पर अग्नि से सम्बंधित उपकरण जैसे गैस चूल्हा, चूल्हा,ओवन, हीटर,इलेक्ट्रिक केतली और इंडक्शन रखा जाना सबसे अच्छा रहता है .

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आग्नेय कोण में मुख्यद्वार

आग्नेय कोण आग्नि की कोण (दिशा) है इस कोण में दरवाजों का लगना सर्वथा अनुचित है . इस दिशा में कभी भी दरवाजे नही निकालने चाहिए और मुख्या द्वार तो कभी नही निकालना चाहिए .क्योंकि यह दिशा रोग और गृह क्लेश का करक मानी जाती है . यह दिशा सब तरह के लाभ को नकारात्मक रूप से प्रभावित  करती है जिससे घर की सब तराकी रुक जाती है . इस दिशा में दरवाजा होने से दिन भर सूर्य की धुप आने से घर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है जो कि हर प्रकार से नुकसान देता है .

आग्नेय कोण में टॉयलेट  

कोई भी आग्नेय कोण में टॉयलेट बना सकता है ऐसे टॉयलेट घर में कोई वास्तु दोष नही होता  है . इस कोण में टॉयलेट के निर्माण में ध्यान रखना चाहिए कि सीट कि दिशा उतर और दक्षिण में हो और व्यक्ति का मुह टॉयलेट में दक्षिण की और हो .

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आग्नेय में बेडरूम हिंदी में,बेडरूम के दोष

आग्नेय कोण मुख्या रूप से अग्नि की दिशा होती है और यह दिशा बेडरूम के लिए कभी भी अच्छी नही मानी जाती है वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिशा में सोने वाले व्यक्ति का स्वभाव कठोर हो जाता है वह बात बात पर गुस्सा करने वाला होता है अगर कपल ऐसे बेडरूम में सोते हैं तो इनके बीच छोटी छोटी बातों को लेकर झगडे होने लगते हैं  और एक दुसरे के लिए मन में इर्ष्या और नफरत पनपने लगती है . अगर बच्चे ऐसे बेडरूम में सोते हैं तो बच्चे जिद्दी और गुस्सेल हो जाते हैं   .

आग्नेय दिशा के दोष  

आग्नेय कोण रसियो के लिए बहुत अच्छा होता है इसके अतिरिक्त यह बेडरूम, गेट, बाथरूम और जीने के लिए अच्छी दिशा नही होती है .ठीक उसी तरह जैसे हर चीज के लाभ और नुकसान दोनों  होते हैं . ऐसे ही आग्नेय दिशा के दोष हैं तो दोस्तों जानते हैं आग्नेय दिशा के दोष .

आग्नेय कोण आग्नि की दिशा और स्थान है इसलिए यहाँ पर पानी का भी माध्यम या साधन न लगाएं . ऐसा करने पर घर में वास्तु दोष उत्पन्न होता है और यह परिवार के लोगों को कई रोगों में डाल देगा .

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उस दिशा या उस स्थान से पानी के सभी माध्यम हटा लेना ही उत्तम होता है नही तो वास्तु दोष निवारण को उस सरसों के तेल का दीपक जलाकर उस स्थान पर रख दें .

आग्नेय कोण में लक्ष्मी जी का भी निवास स्थल होता है  और लक्ष्मी जी को साफ़ सफाई पसंद होती है इसलिए इस उस स्थल पर जल से सम्बंधित कुछ भी नही होना चाहिए क्योंकि जहाँ जल होता है वहां पर गंदगी तो स्वाभाविक है  इससे तन  और धन हानि होती है इसलिए यहाँ पर बाथरूम और टॉयलेट नही बनवाना चाहिए .

आग्नेय कोण में अग्नि का स्थल है इस स्थान पर बेडरूम होने से इसमें सोने वाले लोगों का स्वाभाव परिवार के ही प्रति उग्र होने लगता है .जिससे परिवार में तनाव और कलेश आता  है और परिवार की तरक्की रुक जाती है . घर की लड़कियों के विवाह में समस्याएं  आने लगती हैं

इस वास्तु दोष के निवारण के लिए घर के पुरुषों को स्त्रियों का सम्मान करना चाहिए और घर की स्त्रियों को ब्राह्मणों की पत्नियों को चूड़ी, कंगन और श्रृंगार का सामान दान देना चाहिए . आग्नेय कोण में मुख्य द्वार नहीं बनवाना चाहिए इससे परिवार के मान सम्मान में कमी आती है क्योंकि दक्षिण दिशा यम की दिशा होती है और यम के अन्दर आने कि सम्भावना बढ़ जाती है यह बहुत बड़ा  वास्तु दोष है इस दोष में धन, सम्मान में कमी आने के साथ अकाल  मृत्यु हो सकती है और कोई काम भी  सफल नही होता है इस वास्तु दोष के समाधान के लिए भगवान् गणेश की प्रतिमा ,मुख्यद्वार पर लगनी चाहिए .

आग्नेय कोण में सीढियाँ  

घर में सीढियों का निर्माण आग्नेय कोण में कर सकते हैं इससे परिवार में नुकसान कम से कम होता हैं .