राहू स्तोत्रं हिंदी में | राहू ग्रह | BENEFITS| PDF| MP3

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राहू ग्रह हिंदी में (Rahu Graha in Hindi)

राहू राक्षस स्वरभानु के कटे हुए सिर का नाम है .हिन्दू ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहू गृह भगवान् भैरव का प्रतिनिधित्व करता है . राहू को पापी गृह भी कहते हैं क्योंकि यह लोगों के जीवन में विभिन्न तरह की रुकावटें पैदा करता है , और जीवन को उदास और निराशापूर्ण बना देता है. राहू को बिना धड़ वाले सांप के रूप में  चित्रित किया गया है. इसका कोई अस्तित्व नहीं  है. बल्कि यह छाया गृह है .

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Rahu stotram in Sanskrit राहू स्तोत्रं

राहुर्दानवमंत्री च सिंहिकाचित्तनन्दन:। अर्धकाय: सदा क्रोधी चन्द्रादित्य विमर्दन: ।।1।।

रौद्रो रूद्रप्रियो दैत्य: स्वर्भानु र्भानुभीतिद:। ग्रहराज सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुक: ।।2।।

कालदृष्टि: कालरूप: श्री कण्ठह्रदयाश्रय:। बिधुंतुद: सैंहिकेयो घोररूपो महाबल: ।।3।।

ग्रहपीड़ाकरो दंष्टो रक्तनेत्रो महोदर:। पंचविंशति नामानि स्म्रत्वा राहुं सदानर: ।।4।।

य: पठेन्महती पीड़ा तस्य नश्यति केवलम्। आरोग्यं पुत्रमतुलां श्रियं धान्यं पशूंस्तथा ।।5।।

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राहू ग्रह के बारे में –

विष्णु पुराण के अनुसार समुद्र मंथन में निकले  तेरह रत्नों पर देवताओं और राक्षसों में आपसी सहमति बन गयी लेकिन चौदहवें रत्न, जोकि अमृत से भरा कलश था, अमृत देखते ही दोनों पक्षों में लड़ाई होने लगी क्योंकि अमृत के महत्व को सब बहुत अच्छे से समझते हैं. तब भगवान् विष्णु ने मोहिनी का रूप रखकर दोनों के बीच गए, उन्होंने दोनों को सहमत किया |

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मोहिनी देवताओं को अमृत और दैत्यों को मदिरा पिला रहीं थीं स्वरभानू नामक राक्षस ने मोहिनी  की चालाकी पहचान ली, और अमृत पीने के उद्देश्य से भेष बदल कर देवताओं की पंक्ति में बैठ गया. राहू ने अमृतपान कर लिया सूर्य और चन्द्रमा ने उसे पहचान कर मोहिनी को बताया भगवान् ने अपने चक्र से उसका सर काट कर सिर और धड़ अलग कर दिया लेकिन अमृत पीने के कारण उसका सिर और धड़ जीवित रहा.  उन्हीं के सिर का नाम राहू है.

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राहू दोष के प्रभाव

राहू दोष होने से जातक को मानसिक समस्याओं देने के साथ धनहानि, काल्पनिक डर, अपमान, जुआ, धोखाधाडी, नशा, शारीरिक दुःख और रिश्तों में भी कलह और कलेश देता है. यह किसी को भी गरीब कर सकते हैं. राहू दोषकाल सर्प दोष भी बनाता है.    

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राहू स्तोत्र के लाभ

राहू को मजबूत या प्रसन्न करने के लिए तो बहुत से उपाय हैं.
राहु स्त्रोतम के जाप से राहु दोष दूर होता है।
राहु स्त्रोत के जाप से राहु अन्तर्दशा शांत होती है और मनवांछित परिणाम प्राप्त होने लगते हैं।
जीवन में प्रसन्नता और सफलता मिलती है.
दुश्मन भी मित्र बन जाते हैं.
राहु स्त्रोतम का पाठ सांय के समय स्नान करके राहु देव की मूर्ति के सामने बैठकर जपना लाभदायी होता है।
उपाय में राहू मंत्र, राहू स्त्रोतम, राहु स्तुति, राहू आरती आदि हैं .
ऐसा कहा जाता है कि हनुमान चालीसा और भैरव चालीसा का विधि पूर्वक जाप करके भी राहू को प्रसन्न किया जा सकता है .
भैरव चालीसा का जाप इसलिए, क्योंकि राहू को भैरव का प्रतिनिधि माना गया है .