kal kare so aaj kar hindi meaning and nibandh in hindi hellozindgi

कल करे सो आज कर अर्थ | निबंध | कबीर Birth Death Age Religion

Suvichar

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ।पल में परलय होएगी, बहुरि करेगो कब ॥

ये मनमोहक दोहा भारत के लोकप्रिय कवि कबीर दास जी की रचना है। कबीर दास जी अपनी आसान भाषा में काव्य रचने और धर्म पर विश्वास ना करने के लिए जाने जाते हैं।

कबीर दास जी के बहुत से दोहे आज के वक्त में भी चर्चा में रहते हैं और लोगों को बहुत प्रिय हैं। आज की हमारी ये पोस्ट आपको कबीर दास जी के काल करे सो आज कर…   दोहे का विस्तार में वर्णन करेगी और उनके अन्य दोहों से भी  परिचित कराएगी ।

KABIR DAS JI WILL APPEAR HERE

Kabir Das in Hindi Jivan Parichay-  Birth, Death, Age, Religion.

कबीर दास जी का जीवन परिचय

कबीर दास भारत के एक ऐसे अनूठे कवि थे जिनकी कवितायेँ सरल भाषा में होते हुए भी बहुत सुप्रसिद्ध और लोकप्रिय हैं ।

कबीर दास का जन्म सन् 1440 में काशी में हुआ था। उस ज़माने के कवियों से विपरीत जाकर कबीर दास जी अपनी कविताओं में खड़ी बोली और आसान भाषा का प्रयोग करते थे। उन्होंने 78 वर्ष की आयु तक अपना जीवन जिया ।

कबीर जी एक ईश्वर को मानते थे और किसी विशेष जाती या धर्म के प्रति झुकाव नहीं रखते थे। वह हिंदू और मुसलमान दोनों ही धर्मों के कट्टर आलोचक थे और अवतार, मूर्ति पूजा, रोजा, मंदिर और मस्जिद को नहीं मानते थे।

KABIR DAS JI KA GHAR

Kal Kare So Aaj Kar Doha

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब ॥

Kal Kare so Aaj Kar in Hindi.दोहे का अर्थ

इस दोहे में कबीर दास जी समय का महत्व समझाते हुए कहते हैं की जो काम कल करना है उसे आज करो और जो आज करना है उसे अभी करो क्यों की कुछ पल में जिंदगी खतम हो जाएगी फिर वह काम अधूरा ही रह जाएगा।

कबीर दास जी समय का मूल्य समझाते हुए ये कहना चाह रहे हैं की जितनी जल्दी हो सके व्यक्ति को ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाना चाहिये क्योंकि एक बार वक्त निकल जाने के बाद व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता।

Kal Kare So Aaj Kar Aaj Kare So Ab In English- Meaning

Kal kare so aj kar aj kare so ab
Pal me parlay hoegi bahuri karega kab

The above poem is quoted by the late Kabir Das. He says, what is supposed to be done tomorrow do it today and what is supposed to be done today do it now because time will fly away in a second then all those necessary things will be left undone.

Here late Kabir Das is trying to tell that people should devote themselves to one and only divine God as soon as they can because once the time of devotion will be finished he will never be able to do that again. So devote yourself to one and only God now.

कबीरदास जी के कुछ प्रसिद्ध दोहे

गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पाँय ।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय॥

ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये ।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए ।

बड़ा भया तो क्या भया, जैसे पेड़ खजूर ।
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर ।

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय ।
जो मन देखा आपना, मुझ से बुरा न कोय ।

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय ।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय ।

जहाँ दया तहा धर्म है, जहाँ लोभ वहां पाप ।
जहाँ क्रोध तहा काल है, जहाँ क्षमा वहां आप ।

जाती न पूछो साधू की, पूछ लीजिये ज्ञान ।
मोल करो तलवार का, पड़ा रहने दो म्यान

काल करे सो आज कर essay

यह दोहा कबीर दास जी की रचना है। कबीर दास जी यह कहते हैं कि जो काम कल करने के लिये छोड़ा गया है उसे आज ही पूरा कर लेना चाहिये और जो काम आज करना है उसे अभी कर लेना चाहिए, क्योंकि एक बार प्रलय या मृत्यु आ जाएगी तो उसके बाद कुछ भी करना संभव नहीं रह जाएगा । कहने का अर्थ है की ईश्वर पर खुद को समर्पित करके ईश्वर का ध्यान जल्दी से जल्दी लगा लेना चाहिए क्योंकि एक बार कठिन समय या मृत्यु आ जाये तब इंसान क्या ही कर सकता है।

कबीर दास जी मूर्ति पूजा या पारंपरिक  अनुष्ठानों के सख्त खिलाफ थे और ईश्वर पर समर्पण को ही महत्व देते थे इसलिए कबीर जी कहते हैं कि व्यक्ति को जल्द से जल्द खुद को ईश्वर पर समर्पित कर देना चाहिए क्योंकि व्यक्ति का वक्त कब बदल जाए ये कोई नहीं जनता और उसके बाद समर्पण का काम अधूरा रह जाएगा 

अर्थात इस दोहे में कबीर दास जी समय का अभाव और समर्पण के महत्व को समझाते हैं।