Akbar Birbal Kahani in Hindi | अकबर बीरबल की शिक्षाप्रद कहानियां

Hindi Stories with Moral

अकबर की चुनौती

अकबर का एक बार राज्य के विभिन्न हिस्सों के रईसों के एक संघ द्वारा स्वागत किया गया था. उन्होंने बादशाह से कहा कि वे शाही सलाहकार के पद के लिए आए हैं, जो वर्षों से बीरबल के पास है.

“आप एक परीक्षा दे सकते हैं और हम में से किसी एक को चुन सकते हैं. हम साबित कर सकते हैं कि हम बीरबल से कम नहीं हैं, ”संघ के नेता ने कहा.

अकबर ने एक पल सोचा और मान गया.

“ठीक है. मेरे पास आप सभी के लिए एक परीक्षा है,” अकबर ने अपना कमरबंद हटाते हुए कहा.

वह फर्श पर लेट गया, और रईसों से कहा, “कृपया मुझे सिर से पांव तक मेरे कमरबंद कपड़े से ढँक दो. जो ऐसा करने में सफल हो जाएगा वह मेरा सलाहकार बन जाएगा.”

रईसों ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की, लेकिन पूरे शरीर को ढकने के लिए कपड़ा बहुत छोटा था. यदि वे कपड़े को ऊपर उठाते हैं, तो पैर खुले रह जाते हैं, और यदि वे इसे थोड़ा नीचे खींचते हैं, तो सिर खुले में आ जाता है.

अकबर ने बीरबल को चुनौती दी. बीरबल ने कपड़े पर एक नज़र डाली और अकबर से कहा, “महाराज, कृपया अपने घुटनों को मोड़ो.”

सम्राट ने जैसा कहा वैसा ही किया. बीरबल ने कपड़ा फैलाया और इस बार उसने अकबर को सिर से पाँव तक ढक दिया.

रईसों ने अकबर और बीरबल से माफी मांगी, और बीरबल की स्थिति को फिर कभी चुनौती देने के लिए दरबार छोड़ दिया.

शिक्षा इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी किसी के लिए चुनौती नहीं देना चाहिए.

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जादुई गधा

एक दिन शहंशाह अकबर ने अपनी रानी को बहुत ही कीमती हार तोहफे में दिया. रानी उस कीमती हार को देखकर बहुत ही प्रसन्न हुईं.

अकबर – ये लीजिये आपके लिए हमारी तरफ से ये तोहफा.

रानी – ये तो बहुत ही सुंदर है. ऐसा हार तो मेरे पास एक भी नही है. मुझे ये बहुत ही पसंद आया, बहुत ही सुंदर व खूबसूरत है.

अकबर – हाँ रानी हो भी क्यों न खूबसूरत. मैंने इसे खास कारीगरों से बनबाया है. खास आपके लिए.

रानी – ये मुझे बहुत ही प्रिय है. इसे मैं हमेशा अपने साथ रखूंगी. इसे अपने से अलग नही होने दूंगी. मैं बहुत खुशनसीब हूँ जहाँ पनाह.

अकबर – हमे बहुत ही प्रसन्नता हुई, आपको ये हार पसंद आया. आप इसे जब भी पहनेगीं इसमें हमे आपका प्यार नज़र आएगा.

रानी – शुक्रिया जहाँ पनाह!

फिर जब सुबह को रानी सोकर उठती हैं और नहा कर तैयार होती हैं, तो उन्हें अपना हार नही मिलता है. वह काफी परेशान हो जाती हैं.

रानी – कहां गया हार अभी तो यहीं रखा था, रात जब मैं सोई थी तभी मैंने उसे यहीं रखा था, पता नही कहां चला गया, मेरा हार कहीं दिख ही नहीं रहा . दासियों, दासियों कोई है यहाँ.

रानी के बुलाने पर वहाँ एक दासी आती है.

दासी – क्या हुआ महारानी जी!

रानी – हमारा हार कहीं खो गया है, हमे उसे ढूंढने में हमारी सहायता कीजिए, रात सोने से पहले हमने उसे यहीं रखा था, लेकिन अब पता नहीं वह कहाँ है.

दासी – महारानी जी आप कोई दूसरा हार पहन लीजिये, आपके पास तो कई हार हैं.

रानी – नही, नही बिल्कुल नहीं, वो हार बहुत ही खास हार है. हमे वो जहाँ पनाह ने बहुत प्यार से दिया था. हमे वही हार चाहिए, कोई और दूसरा हार नही चाहिये.

ये बात कह कर रानी नाराज होकर बैठ जाती हैं, तभी वहाँ थोड़ी ही देर में अकबर आते हैं –

अकबर – क्या हुआ आपको, आप इतनी उदास क्यों बैठी हुई हो?

रानी – जहाँ पनाह, वो.. जहाँ पनाह आपने जो हार हमे तोहफे में दिया था, वो कहीं खो गया है.

अकबर – खो गया है, क्या मतलब खो गया है, आप कहना क्या चाहती हैं, कहीं वो आपने गिरा तो नही दिया.

रानी – जहाँ पनाह मैंने रात सोने से पहले उसे यहीं उतार कर रखा था, फिर न जाने वो कहाँ गायब हो गया. जहाँ पनाह हमे माफ कर दीजिए, हम आपके तोहफे की हिफाज़त नही कर पाए. (और वह रोने लगीं)

अकबर – महारानी आप रोये मत. वो बस मामूली सा तोहफा था, हम आपके लिए और उससे भी अच्छा हार बनबा देंगे और हम आपसे वादा करते हैं. और हम आपको वो हार भी ढूंढ कर देंगे. बस आप परेशान न हों. आज आप हमारे कमरे में ही ठहर जाइये.

सिपाही तुम और दूसरे सिपाहियों और दासियो को लेकर जाओ और पूरे रानी के कमरे के हर एक कोने में जाकर ढूंढो उस हार को.

सिपाही – वो…वो, जहाँ पनाह महल के दूसरे हिस्सों में भी चोरियां हो चुकी हैं. हम सभी ने उस चोर को पकड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन न कामयाब रहे . आज तक उस चोर को हम नही पकड़ पाए.

शिक्षा हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी किसी सुन्दरता के विषय में बात नही करनी चाहिए.

दोस्तों आप सभी के मनोरंजन के लिए प्रस्तुत है kahani akbar birbal ki. हमे उम्मीद है की ये akbar birbal kahani in hindi आपके अपनों के लिए न केवल मनोरंजन है बल्कि एक अच्छा समय व्यतीत करने का साधन भी है.

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एक पेड़ दो मालिक

अकबर बादशाह दरबार लगा कर बैठे थे. तभी राघव और केशव नाम के दो व्यक्ति अपने घर के पास स्थित आम के पेड़ का मामला ले कर आए. दोनों व्यक्तियों का कहना था कि वे ही आम के पेड़ के असल मालिक हैं और दूसरा व्यक्ति झूठ बोल रहा था. क्योंकि आम का पेड़ फलों से लदा होता है, इसलिए दोनों में से कोई उसपर से अपना दावा नहीं हटाना चाहता.

मामले की सच्चाई जानने के लिए अकबर राघव और केशव के आसपास रहने वाले लोगो के बयान सुनते हैं. पर कोई फायदा नहीं हो पाता है. सभी लोग कहते हैं कि दोनों ही पेड़ को पानी देते थे. और दोनों ही पेड़ के आसपास कई बार देखे जाते थे.

पेड़ की निगरानी करने वाले चौकीदार के बयान से भी साफ नहीं हुआ कि पेड़ का असली मालिक राघव है या केशव है, क्योंकि राघव और केशव दोनों ही पेड़ की रखवाली करने के लिए चौकीदार को पैसे देते थे. अंत में अकबर थक हार कर अपने चतुर सलाहकार मंत्री बीरबल की मदद लेते हैं. बीरबल तुरंत ही मामले की जड़ पकड़ लेते है. पर उन्हे सबूत के साथ मामला साबित करना होता है कि कौन – सा पक्ष सही है और कौन – सा पक्ष झूठा. इसलिए वह एक नाटक रचते हैं.

बीरबल आम के पेड़ की चौकीदारी करने वाले चौकीदार को एक रात अपने पास रोक लेते हैं. उसके बाद बीरबल उसी रात को अपने दो भरोसेमंद व्यक्तियों को अलग – अलग राघव और केशव के घर “झूठे समाचार” के साथ भेज देते हैं. और समाचार देने के बाद छुप कर घर में होने वाली बातचीत सुनने का आदेश देते हैं.

केशव के घर पहुंचा व्यक्ति बताता है कि आम के पेड़ के पास कुछ अज्ञात व्यक्ति पके हुए आम चुराने की फिराक में है. आप जा कर देख लीजिये. यह खबर देते वक्त केशव घर पर नहीं होता है, पर केशव के घर आते ही उसकी पत्नी यह खबर केशव को सुनाती है.

केशव बोलता है, “हां,हां, सुन लिया अब खाना खाने लगा. वैसे भी बादशाह के दरबार में अभी फैसला होना बाकी है, पता नही हमे मिलेगा कि नहीं. और खाली पेट चोरों से लड़ने की ताकत कहाँ से आएगी, वैसे भी चोरों के पास तो आजकल हथियार भी होते हैं.”आदेश अनुसार “झूठा समाचार” पहुंचाने वाला व्यक्ति केशव की यह बात सुनकर बीरबल को बता देता है.

राघव के घर पहुंचा व्यक्ति बताता है, “आप के आम के पेड़ के पास कुछ अज्ञात व्यक्ति पके हुए आम चुराने की फिराक में है. आप जा कर देख लीजियेगा.”यह खबर देते वक्त राघव भी अपने घर पर नहीं होता है, पर राघव के घर आते ही उसकी पत्नी यह खबर राघव को सुनाती है.

राघव आव देखता है न ताव, फ़ौरन लाठी उठता है और पेड़ की ओर भागता है. उसकी पत्नी आवाज लगाती है, अरे खाना तो खा लो फिर जाना , राघव जवाब देता है कि, “खाना भागा नहीं जाएगा पर हमारे आम के पेड़ से आम चोरी हो गए तो वह वापस नहीं आएंगे” इतना बोल कर राघव दौड़ता हुआ पेड़ के पास चला जाता है. आदेशानुसार “झूठा समाचार” पहुंचाने वाला व्यक्ति बीरबल को सारी बात बता देता है.

दूसरे दिन अकबर के दरबार में राघव और केशव को बुलाया जाता है. और बीरबल रात को किए हुए परीक्षण का वृतांत बादशाह अकबर को सुना देते हैं जिसमे भेजे गए दोनों व्यक्ति गवाही देते हैं. अकबर राघव को आम के पेड़ का मालिक घोषित करते हैं. और केशव को पेड़ पर झूठा दावा करने के लिए कड़ा दंड देते हैं. तथा मामले को बुद्धि पूर्वक, चतुराई से सुलझाने के लिए बीरबल की बहुत ही प्रशंशा करते हैं.

शिक्षा ठगी करने वाले व्यक्ति को अंत में दण्डित होना पड़ता है, इसलिए कभी किसी को धोखा ना दें.

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कल , आज और कल

एक दिन बादशाह अकबर ने घोषणा की कि जो भी मेरे सवालों का सही जवाब देगा उसे भारी ईनाम दिया जाएगा. सवाल कुछ इस प्रकार से थे-

ऐसा क्या है जो आज भी है और कल भी रहेगा ?ऐसा क्या है जो आज भी नहीं है और कल भी नहीं होगा ? ऐसा क्या है जो आज तो है लेकिन कल नहीं होगा ?

इन तीनों सवालों के उदाहरण भी देने थे.

किसी को भी चतुराई भरे इन तीनों सवालों का जवाब नहीं सूझ रहा था. तभी बीरबल बोला, ‘‘हुजूर ! आपके सवालों का जवाब मैं दे सकता हूं, परन्तु इसके लिए आपको मेरे साथ शहर में घूमना होगा. तभी आपके सवालों का जबाव आपको मिल पाएगा.”

अकबर और बीरबल ने भेष बदलकर और सूफियों का बाना पहनकर निकल पड़े. कुछ ही देर बाद वे बाजार में खड़े थे. फिर दोनों एक दुकान के अंदर गए. बीरबल ने दुकानदार से कहा, ‘‘हमें बच्चों की पढ़ाई के लिए मदरसा बनाना चाहते हैं, तुम हमें इसके लिए एक हजार रुपये दे दो.’’ जब दुकानदार ने अपने मुनीम से कहा कि इन्हें एक हजार रुपये दे दो तो बीरबल ने कहा , कि जब मैं तुमसे रुपये ले रहा हूंगा तो तुम्हारे सिर पर जूता मारूंगा. हर एक रुपये के पीछे एक जूता पड़ेगा. बोलो, तैयार हो ?’’

यह सुनते ही दुकानदार के नौकर का पारा चढ़ गया और वह बीरबल से दो-दो हाथ करने आगे बढ़ आया. लेकिन दुकानदार ने नौकर को शांत करते हुए कहा, ‘‘मैं तैयार हूँ, लेकिन मेरी एक शर्त है. मुझे विश्वास दिलाना होगा कि मेरा पैसा इसी नेक काम के लिए खर्च होगा.’’

ऐसा कहते हुए दुकानदार ने सिर झुका दिया और बीरबल से बोला कि जूता मारना शुरू करें. तब बीरबल व अकबर बिना कुछ कहे-सुने दुकान से बाहर निकल आए.

दोनों चुपचाप चले जा रहे थे कि तभी बीरबल ने मौन तोड़ा, ‘‘बंदापरवर ! दुकान में जो कुछ हुआ उसका मतलब है कि दुकानदार के पास आज पैसा है और उस पैसे को नेक कामों में लगाने की नीयत भी रखता है , जो उसे आने वाले कल (भविष्य) में नाम देगी. इसका एक मतलब यह भी है कि अपने नेक कामों से वह जन्नत में अपनी जगह पक्की कर लेगा. आप इसे यूं भी कह सकते हैं कि जो कुछ उसके पास आज है, कल भी उसके साथ होगा. यह आपके पहले सवाल का जवाब है.’’

फिर वे चलते हुए एक भिखारी के पास पहुंचे. उन्होंने देखा कि एक आदमी उसे कुछ खाने को दे रहा है और वह खाने का सामान उस भिखारी की जरूरत से कहीं अधिक है. तब बीरबल उस भिखारी से बोला, ‘‘हम भूखे हैं, हमें भी कुछ खाने को दे दो .’’

यह सुनकर भिखारी बरस पड़ा, ‘‘भागो यहां से. जाने कहां से आ जाते हैं मांगने.’’

तब बीरबल बादशाह से बोला, ‘‘यह रहा हुजूर आपके दूसरे सवाल का जवाब. यह भिखारी ईश्वर को खुश करना नहीं जानता. इसका मतलब यह है कि जो कुछ इसके पास आज है, वो कल नहीं होगा.’’

दोनों फिर आगे बढ़ गए. उन्होंने देखा कि एक तपस्वी पेड़ के नीचे तपस्या कर रहा है. बीरबल ने पास जाकर उसके सामने कुछ पैसे रखे. तब वह तपस्वी बोला, ‘‘इसे दूर हटाओ यहां से. मेरे लिए यह बेईमानी से पाया गया पैसा है. ऐसा पैसा मुझे बिल्कुल नहीं चाहिए.’’

अब बीरबल बोला, ‘‘हुजूर ! इसका मतलब यह हुआ कि अभी तो नहीं है लेकिन बाद में हो सकता है. आज यह तपस्वी सभी सुखों को त्याग कर रहा है. लेकिन कल यही सब सुख इसके पास होगा.’’

‘‘और हुजूर ! चौथी मिसाल आप खुद हैं. पिछले जन्म में आपने शुभ कर्म किए थे जो यह जीवन आप शानो-शौकत के साथ बिता रहे हैं, किसी चीज की कोई कमी नहीं है. यदि आपने इसी तरह ईमानदारी और न्यायप्रियता से राज करना जारी रखा तो कोई कारण नहीं कि यह सब कुछ कल भी आपके पास न हो. लेकिन यह न भूलें कि यदि आप राह भटक गए तो कुछ साथ नहीं रहेगा.’’

अपने सवालों के बुद्धिमत्तापूर्ण चतुराई भरे जवाब सुनकर बादशाह अकबर बेहद खुश हुए.

शिक्षा इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी नियत साफ रखनी चाहिए.

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शेर का पिंजरा

एक बार, फारसी सम्राट ने एक कृत्रिम शेर के साथ एक बड़ा पिंजरा भेजा. पिंजरे में बंद शेर ऐसा लग रहा था जैसे वह असली हो. दरबार में जब पिंजरा पहुंचा तो कई दरबारी डर गए. कुछ तो खंभों के पीछे छिपने भी चले गए. यहां तक ​​कि बादशाह अकबर भी कुछ दिल की धड़कनों से चूक गए. शेर का मुंह दो बड़े उभरे हुए दांतों से खुला था.

पिंजरा लाने वाले लोगों ने सम्राट को सलाम किया और कहा, “हमारे सम्राट ने यह पिंजरा भेजा है और वह जानना चाहता है कि क्या आपका कोई देश पिंजरे को तोड़े बिना या शेर की मुद्रा बदले शेर को पिंजरे से बाहर निकाल सकता है.” सभी हैरान थे. ऐसा कोई नहीं कर पाया. सभी तीर्थयात्रा पर गए बीरबल की प्रतीक्षा कर रहे थे. एक महीने में उसकी आने की उम्मीद थी. समस्या के समाधान के लिए केवल बीस दिन का समय दिया गया था. अकबर बहुत ही चिंतित था.

अगले दिन अब्दुल फजल और फावजी ने शेर के शरीर को तोड़कर उसे पिंजरे से बाहर निकालने की पेशकश की. यह संभव नहीं था. शेर का शरीर किसी धातु का बना हुआ था.

सौभाग्य से, बीरबल जल्दी वापस आ गया क्योंकि उसकी पत्नी यात्रा के दौरान गर्मी सहन नहीं कर सकी. अकबर ने तुरंत उसे आने को कहा और पिंजरा दिखाया. बीरबल ने पिंजरे और शेर की सावधानीपूर्वक जांच की और समस्या को हल करने के लिए एक दिन का समय मांगा. अकबर को विश्वास था कि बीरबल इसे हल करने में सक्षम होंगे. बीरबल ने पाया कि शेर मोम से बना था और उस पर किसी धातु का लेप चढ़ा दिया गया था.

अगले दिन वह लोहे की रॉड लेकर आया. जब वह दरबार में आया, तो बीरबल ने अपने परिचारक से कहा कि वह छड़ को तब तक गर्म करे जब तक वह लाल न हो जाए. रॉड में लकड़ी का हैंडल था. बीरबल लाल गर्म छड़ को शेर के पास ले गया. शेर गर्मी में पिघलने लगा. कुछ ही मिनटों में शेर का पूरा शरीर पिघलकर बाहर आ गया.

तब पिंजरे में कोई शेर नहीं था. पहेली सुलझ गई. अकबर बहुत ही प्रसन्न हुआ. सभी दरबारियों ने बीरबल की खूब प्रशंसा की.

शिक्षा इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हम अपनी बुद्धिमत्ता से किसी भी समस्या का हल निकाल सकते हैं.

बीरबल ने चोर को पकड़ा

एक बार एक धनी व्यापारी का घर लूट लिया गया. व्यापारी को शक था कि चोर उसका नौकर है. इसलिए उन्होंने बीरबल के पास जाकर घटना के बारे में बताया. बीरबल उस व्यापारी के घर गया और सभी नौकरों को इकट्ठा किया और सभी नौकरों से पुछा कि व्यापारी का सामान किसने चोरी किया है. सभी नौकरों ने साफ मना कर दिया.

बीरबल ने एक पल सोचा, फिर व्यापारी के सभी नौकरों को बराबर लंबाई की एक छड़ी दी और उनसे कहा कि असली चोर की छड़ी कल दो इंच लंबी हो जायेगी. सभी सेवक कल फिर लाठी लेकर यहां उपस्थित हो जाने चाहिए.

सब सेवक अपने-अपने घर को चले गए और दूसरे दिन फिर उसी स्थान पर इकट्ठे हुए. बीरबल ने उन्हें अपनी लाठी दिखाने को कहा. नौकरों में से एक की छड़ी दो इंच छोटी पाई गई . बीरबल ने कहा, “यह तुम्हारा चोर है, व्यापारी.”

बाद में व्यापारी ने बीरबल से पूछा, “तुमने उसे कैसे पकड़ा?” बीरबल ने कहा, “चोर ने पहले ही रात में अपनी छड़ी को दो इंच छोटा कर दिया था, इस डर से कि उसकी छड़ी सुबह तक दो इंच लंबी हो जाएगी.”

शिक्षा सत्य की हमेशा जीत होगी.

हम उम्मीद करते हैं कि akbar birbal in hindi story आपको जरूर पसंद आ रही होंगी. आइये कुछ और akbar birbal ki kahani cartoon के साथ देखते हैं.

रंगीन पक्षी

अकबर को पक्षियों का बहुत शौक था. एक दिन एक पक्षी पकड़ने वाला उसके राज्य में आया. उसके पास एक बहुत ही रंगीन पक्षी था. पक्षी पकड़ने वाले ने सम्राट अकबर से कहा कि यह पक्षी न केवल मोर की तरह रंगीन है, बल्कि यह उसकी तरह नृत्य भी कर सकता है और उड़ भी सकता है. बर्ड कैचर को तुरंत 50 सोने के सिक्कों से पुरस्कृत किया गया. उसने जल्दी में राज्य छोड़ दिया.

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Akbar Birbal Stories in Hindi with Moral | मनोरंजक कहानियां

जब पक्षी पकड़ने वाला चला गया तो बीरबल ने सम्राट से कहा – “यह पक्षी मोर की तरह नृत्य नहीं कर सकता और यह कई महीनों से नहाया नहीं है.” बीरबल ने आगे सुझाव दिया – “मुझे इसको नहालाने दो.” और एक गिलास पानी मांगा.

जब बीरबल ने चिड़िया को नहलाया तो हर कोई यह देखकर हैरान रह गया कि यह कोई विशेष पक्षी नहीं बल्कि वास्तव में एक कबूतर था और पक्षी पकड़ने वाले ने हर शरीर को रंगकर मूर्ख बनाया था. उसका रंग पानी के साथ निकल रहा था.

सभी ने बीरबल से पूछा कि उन्हें यह कैसे पता चला. बीरबल ने बताया कि उन्होंने पक्षी पकड़ने वाले के नाखूनों पर रंग देखा. पक्षी पकड़ने वाले को पकड़ लिया गया और उसे सजा दी गई. पक्षी पकड़ने वाले को जो इनाम दिया जाता था वह अब बीरबल को दे दिया गया.

शिक्षा इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमें किसी को धोखा नहीं देना चाहिए.

हम समझते हैं की लम्बी लम्बी कहानियां पढना और सुनना कुछ हद तक बोरियत भरा हो सकता है इसीलिए हम akbar birbal ki kahani in hindi short story प्रस्तुत कर रहे हैं. इस पेज की खासियत ये है की akbar birbal story for kids दी जा रही हैं. इसीलिए ये छोटी छोटी कहानियां काफी हद तक आपको मनोरंजक लगेंगी.

तीन मूर्खों की कहानी

एक बार बादशाह ने अकबर को बुलाया और कहा कि मैंने बीरबल राजा की बात को राज्य से तीन मूर्खों को खोजकर नहीं रोका और उसने कहा कि अकबर, मैं अभी आया हूं और तीन मूर्खों को पाया जब बीरबल वहां से चलकर ही दूरी तक पहुंचे.

वहाँ एक घोड़ा मिला और देखा कि घुड़सवार सेना पर लकड़ी का एक लबादा है. बीरबल ने पूछा, तुमने इस गठरी को सिर पर क्यों रखा, घोड़े पर क्यों नहीं रखा? उस आदमी ने कहा कि घोड़ा बहुत कमजोर है और यह एक बंडल के वजन को कैसे संभालें. अगर मैं उस पर लाठी रख दूं तो घोड़ा मर जाएगा और मैं मर जाऊंगा, इसलिए मैं इसे अपने सिर पर ले रहा हूं. बीरबल ने सोचा कि यह महान मूर्खों में से एक है,

फिर जब बीरबल थोड़ा और आगे बढ़े, तो एक आदमी दूर चला जा रहा था , और रात का समय हो रहा था एवं  उसने अपने हाथ में एक लालटेन लिया था और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कि वह कुछ ढूंढ रहा हो बीरबल जी ने उससे पूछा कि क्या देख रहे हो तो उस आदमी ने कहा कि मेरा एक सिक्का यहां गिर गया है, मैं उसे ढूंढ रहा हूँ , बीरबल ने पूछा कि वह कहां गिरा, तो उस आदमी ने कहा कि वह वहां पेड़ के नीचे गिरा है, तो बीरबल जी ने कहा कि तुम वहां क्यों नहीं ढूंढते यहां क्यों ढूंढ रहे हैं. यहां कोई सिक्का नहीं है. आदमी ने कहा  पेड़ के पास बहुत अंधेरा है, तो मैं उसे वहां भी कैसे ढूंढ पाउँगा.

मैं यहाँ ढूंढ रहा हूं क्योंकि यहां लालटेन भी जल रही है और मुझे सिक्का खोजने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है. अब बीरबल समझ गए थे कि यह दूसरा आदमी है जो सबसे ज्यादा मूर्ख है और फिर बीरबल जी ने उसे भी दूसरे आदमी के पास पहुंचा दिया. इन्हें अपने साथ ले जाओ, जैसे ही बीरबल दो आदमियों को ले जा रहा था,  काफी ढूंढ़ने के बाद भी उन्हें कोई तीसरा व्यक्ति नहीं मिल रहा था. दरबार में पहुंचे बीरबल, अकबर ने कहा कि यह तो दो आदमी हैं. मैंने तुमसे तीन आदमियों को लाने को कहा था

बीरबल जी ने कहा कि मुझे तो ये दोनों ही मिले हैं. माफ करना, अकबर को खोजने के लिए मुझे दो मूर्ख मिले हैं, लेकिन अकबर ने कहा कि जहां तीसरा व्यक्ति था, वहां तीसरा भी आना था. तब बीरबल जी ने उत्तर दिया कि तीसरा व्यक्ति केवल मैं, मैं हूं. क्योंकि मुझे एक काम दिया गया है जो एक मूर्ख को दिया जाता है जब अकबर ने इसे सुना और बहुत प्रसन्न हुआ और बीरबल की अंतर्ज्ञान की भावना को भी अच्छी तरह से वर्णित किया.

क्योंकि बीरबल ने उसे तुरंत जवाब दिया था जिसका किसी ने सोचा भी नहीं था कि अकबर ने दोनों मूर्खों को इनाम देकर वहाँ से भेज दिया.

शिक्षा इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी मूर्खता से काम नहीं लेना चाहिए.

दुष्ट नाई की दुर्दशा

ऐसा कहा जाता हैं, कि बीरबल अपनी बुद्धिमत्ता और हाज़िर जवाबी के कारण न केवल बादशाह अकबर के पसंदीदा मंत्री थे, बल्कि अधिकांश आम लोगों के भी बहुत ही शुभ चिन्तक थे.

अनेक लोग अपने व्यक्तिगत मामलों पर सलाह के लिए भी दूर-दूर से उनके पास आते थे. हालांकि, मंत्रियों का एक समूह था जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता से ईर्ष्या करते थे और बीरबल को पसंद भी नहीं करते थे. वे बाहर से तो बीरबल की प्रशंसा करते थे लेकिन अंदर से, वे उसे मारने की साजिश रचते थे.

एक दिन वे एक योजना के साथ, राजा के नाई के पास पहुंचे. क्योंकि नाई राजा के बहुत ही करीब था, इसलिए उन्होंने नाई से बीरबल से स्थायी रूप से छुटकारा दिलाने में मदद करने को कहा. उन्होंने उसके बदले में एक बड़ी रकम उसे देने का वादा किया. दुष्ट नाई आसानी से सहमत हो गया.

अगली बार जब राजा को नाई की सेवा की आवश्यकता पड़ी, तो नाई बातों-बातों में सम्राट के पिता के बारे में बातचीत शुरू कर दी, उसने राजा से पूछा कि महराज जैसे आप इतनी बड़ी समृद्धि का आनंद ले रहे है, क्या आपने अपने पूर्वजों के कल्याण के लिए कुछ किया है ?

राजा को यह बात अच्छी नही लगी और उसने नाई से कहा कि अब यह संभव नहीं है क्योंकि वे पहले से ही मर चुके है. नाई ने राजा से कहा कि वह एक जादूगर के बारे में जानता है जो इसमें आपकी सहायता कर सकता है.

जादूगर आपके पिता के कल्याण के बारे में पूछताछ करने के लिए एक व्यक्ति को स्वर्ग भेज सकता है. लेकिन निश्चित रूप से उस व्यक्ति को सावधानी से चुनना होगा. वह बुद्धिमान और जिम्मेदार होना चाहिए.

उसके पास जादूगर के निर्देशों का पालन करने के साथ-साथ ऑन-द-स्पॉट निर्णय लेने के लिए पर्याप्त बुद्धि होनी चाहिए. नाई ने इस कार्य के लिए सभी मंत्रियों में से सबसे बुद्धिमान व्यक्ति बीरबल का नाम लिया.

राजा अपने मृत पिता की बात सुनकर बहुत उत्साहित थे और उन्होंने नाई से कहा कि वह इसकी तुरंत व्यवस्था करें. अकबर ने उससे पूछा कि इसके लिए मुझे क्या करना होगा.

नाई ने राजा को समझाया कि वे बीरबल को एक चिता के अंदर डाल देंगे और चिता को जलाएंगे.जादूगर तब कुछ मंत्रों का जाप करेगा, जिससे बीरबल को आग से बचाने में मदद मिलेगी. बीरबल धुएं के माध्यम से स्वर्ग पहुंच जाएंगे.

राजा ने खुशी-खुशी बीरबल को इस योजना की जानकारी दी. बीरबल ने कहा कि यह तो एक शानदार विचार है लेकिन महराज, मै यह जानना चाहता हूँ कि इसके पीछे किसका हाथ है.

जब बीरबल को पता चला कि यह नाई का विचार है, तो वह इस शर्त पर स्वर्ग जाने को तैयार हो गया कि उसे लंबी यात्रा के लिए एक बड़ी रकम दी जाए और साथ ही साथ अपने परिवार को बसाने के लिए एक महीने का समय दिया जाए ताकि मेरे चले जाने के बाद उन्हें कोई परेशानी व दिक्कत न हो. राजा दोनों शर्तों पर सहमत हो गया.

एक  महीने की अवधि में, बीरबल ने अपने कुछ भरोसेमंद लोगों को, जहां चिता जलानी थी वहां से अपने घर तक एक सुरंग बनाने को कहा. और जिस दिन, चिता जलाई गयी, बीरबल सुरंग के अंदर छिपकर अपने घर पहुंच गया.

वह अपने घर में छिप गया, जहां वह कुछ महीनों तक छिपा रहा, अब उसके बाल और दाढ़ी लंबे और बड़े हो गए.

इस बीच, उनके दुश्मन आनन्दित थे क्योंकि उन्होंने सोचा था कि बीरबल मर चुका है. फिर एक दिन, कई महीनों के बाद बीरबल राजा के पिता की खबर लेकर महल पहुंचे.

राजा उसे देखकर बहुत प्रसन्न हुए और उनके मन में कई तरह के सवाल थे. बीरबल ने राजा को बताया कि उनके पिता श्रेष्ठ आत्माओं में से एक थे लेकिन उन्हें वहां एक सुख को छोड़कर सभी सुख मिलता है.

राजा जानना चाहता थे कि वहां ऐसा कौन – सा सुख है जो उन्हें प्राप्त नही हुआ. बीरबल ने उत्तर दिया कि स्वर्ग में कोई नाई नहीं है , यही वजह है कि उन्हें अपनी दाढ़ी बढ़ाने के लिए भी मजबूर होना पड़ा. आपके पिता ने एक अच्छे नाई को भेजने के लिए बोला है.

इसलिए राजा ने स्वर्ग में अपने पिता की सेवा करने के लिए अपना खुद का नाई भेजने का फैसला किया. उसने नाई और जादूगर दोनों को बुलाकर उसे स्वर्ग भेजने की तैयारी की.

नाई अपने बचाव में कुछ भी नहीं कह सकता था क्योंकि वह अपने जाल में बुरी तरह फंस चुका था. और एक बार चिता जलने के बाद नाई कि मौके पर ही मौत हो गई.

शिक्षा :- जो दूसरे के लिए गड्ढा खोदता है वह खुद उस गड्ढा में गिर जाता है.

एक किलो मांस

एक बार अकबर के राज्य में दो जमींदार रहते थे, एक का नाम था नेकचंद और एक का नाम था बद्दीचंद. नेक चंद एक बहुत अच्छे इंसान थे जो हमेशा लोगों की सहायता के लिए तैयार रहते थे और लोगों को कम ब्याज पर पैसे देते थे. जबकि बद्दीचंद बहुत ही लालची और घमंडी व धोखेबाज किस्म का इंसान था.

वह व्यक्तियों को पैसे भी देता था लेकिन उस पर बहुत अधिक ब्याज लेता था. एक बार नेकचंद का दोस्त कमल नेकचंद के पास आया और कहा कि उसे 500 सोने के सिक्के चाहिए. नेकचंद के पास केवल 300 ही सोने के सिक्के थे. उसने कमल को जो दिया, कुछ दिनों बाद देने को कहा.

लेकिन कमल ने कहा कि उन्हें आज सभी 500 सोने के सिक्कों की जरूरत है. क्योंकि वह नेकचंद का एक अच्छा दोस्त था, नेकचंद उसके लिए बाकी सोने के सिक्के लेने के लिए बद्दीचंद के पास गया. बद्दीचंद के पास 200 सोने के सिक्के थे जिन्हें वह देने के लिए तैयार हो गया.

नेकचंद ने उससे कहा कि वह 6 महीने में सिक्का लौटा देगा. बद्दीचंद ने नेकचंद से कहा कि 6 महीने में 50 सोने के सिक्के और ब्याज लगेगा और अगर वह 6 महीने में इसे वापस नहीं कर सका, तो नेकचंद को अपने शरीर से 1 किलो मांस बद्दीचंद को देना होगा.

नेकचंद को विश्वास था कि उसका दोस्त समय पर सोने का सिक्के लौटा देगा, इसलिए उसने बद्दी चंद की अजीब स्थिति को स्वीकार कर लिया. छह महीने बीत गए लेकिन बद्दीचंद नेकचंद के सोने के सिक्के वापस नहीं कर सका. बद्दीचंद अपने सोने के सिक्के लेने के लिए नेकचंद के पास गया.

नेकचंद ने कहा कि उसका दोस्त आज शाम तक सिक्के लाएगा. उन्होंने नेकचंद को शाम तक का समय दिया. लेकिन उसका दोस्त कमल नहीं आया. अगले दिन बद्दीचंद ने नेकचंद को अपने घर के बाहर रोक लिया और अपने सिक्के मांगने लगा.

नेकचंद ने कहा कि उसे 2 – 3 दिन की मोहलत और दे दो और उसका दोस्त आ जाएगा. बद्दीचंद ने मना कर दिया और अपनी तलवार निकाल ली और नेकचंद के शरीर से 1 किलो मांस निकालने लगा. उनका झगड़ा सुनकर वहां बहुत से लोग जमा हो गए.

जिसके बाद अकबर की घुड़सवार सेना भी वहां पहुंच गई. जब उसने लोगों से पूछा तो लोगों ने कहा कि बद्दीचंद खून का प्यासा आदमी है जो नेकचंद के पैसे नहीं लौटाने पर उसके शरीर का मांस काटना चाहता है. सिपाही दोनों को लेकर अकबर के दरबार में गया.

बादशाह अकबर ने उससे लड़ाई का कारण पूछा तो नेकचंद ने सारी बात बता दी और कहा कि वह अपने सोने के सिक्के 1-2 दिन में लौटा देगा. तभी नेकचंद का दोस्त वहां पहुंचा और उसने कहा कि वह सारे सिक्के ले आया है.

अकबर ने कहा, अच्छा तो तुम दोनों का मामला सुलझ गया. बद्दीचंद ने फिर भी कहा कि हमारे 6 महीने में सोने के सिक्के को वापस करने की बात हो रही थी, अब जब इससे ज्यादा समय हो गया, तो मैं नेकचंद के शरीर से 1 किलो मांस काट लुँगा.

सबको पता चल गया कि बद्दीचंद खून का प्यासा है. बीरबल ने बद्दीचंद से कहा, ठीक है, अपनी तलवार ले लो और नेकचंद के शरीर से 1 किलो मांस काटने के लिए आगे बढ़ो, लेकिन ध्यान रखना कि उसके शरीर से खून नहीं आना चाहिए क्योंकि केवल मांस काटने की बात हो रही थी.

इस पर बद्दीचंद रुक गया और उसने अपनी गलती स्वीकार कर ली कि अगर दोनों एक ही धंधे में हैं तो वह नेकचंद को अपने रास्ते से हटाना चाहता है.

बादशाह अकबर ने बद्दीचंद को 1 साल की कैद की सजा सुनाई और नेकचंद को दिए गए सोने के सिक्कों का फैसला भी सुनाया.

शिक्षा इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी जानबूझकर गलती नहीं करनी चाहिए.