Food chain in Hindi | 2 प्रकार | महत्व | अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

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आज इस पोस्ट में हम आपको आसान शब्दों में Food chain in Hindi के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। चलिए जानते हैं Food chain in Hindi.

आहार श्रृंखला – 

बता दें कि किसी भी प्राकृतिक समुदाय में पाया जाने वाला जीवधारियों का क्रम जिसके माध्यम से ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है। पौधों से आरंभ होने वाले इस क्रम में प्रत्येक जीव अपने से पहले जीव पर भोजन या फिर ऊर्जा के लिए पूर्ण रूप से निर्भर होता है।

एक जीव से दूसरे जीव में आहार ऊर्जा के स्थानान्तरण को श्रृंखला कहते हैं। वह बिन्दु या फिर स्तर जिस पर एक जीव से दूसरे जीव में ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है, वह पोषण स्तर (trophic level) कहलाता है। किसी-किसी पारिस्थिक तंत्र या फिर जीवमंडल में आहार (ऊर्जा) का एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर में स्थानांतरण अति जटिल श्रृंखलाओं के माध्यम से ही होता है। इस जटिल आहार श्रृंखला को आहारजाल भी कहकर पुकारते हैं. आहार श्रृंखला विभिन्न क्रमिक पोषण स्तरों की संयुक्त श्रृंखला बनी होती है।

महत्व:

बता दें कि खाद्य श्रृंखला का अध्ययन खाद्य संबंधों एवं किसी भी पारिस्थितिक तंत्र में जीवों के मध्य बातचीत को समझने में बहुत ही सहायता करता हैं। खाद्य श्रृंखला का अध्ययन हमें जैव-आवर्धन की परेशानियों को समझने में बहुत ही सहायता करता रहता है।

खाद्य श्रृंखला के प्रकार (Types of Food Chain) – 

ध्यान रहे कि सामान्यतः खाद्य श्रृंखला के केवल दो ही प्रकार होते हैं।

1. चारण खाद्य श्रृंखला (Grazing Food Chain) –

दरअसल चराई खाद्य श्रृंखला उत्पादकों से होकर शाकभक्षियों, माँसभक्षियों तथा सर्वाहारियों तक जाती है। हर स्तर पर श्वसन, उत्सर्जन और विघटन के द्वारा ही ऊर्जा का ह्वास होता जाता है। यह खाद्य श्रृंखला हरे पौधों से शुरू होती है एवं प्राथमिक उपभोक्ता शाकभक्षी होता है। उपभोक्ता जो भोजन के रूप में पौधों अथवा पौधों के भागों का इस्तेमाल करके श्रृंखला आरम्भ करते हैं, चारण खाद्य श्रृंखला का निर्माण करते हैं।

जैसे –  घास → टिड्डा → पक्षीगण → बाज

2. अपरद खाद्य श्रृंखला (Detritus Food Chain) – 

बता एन कि अपरद खाद्य श्रृंखला, चराई खाद्य श्रृंखला के जीवों के मरने के पश्चात ही आरंभ होती है। चराई श्रृंखला के जीव जब मरते हैं तो अपघटक उन पर एंजाइम छोड़कर अपनी क्रिया करते हैं।

अपघटक वे होते हैं, जो मृत जीवों पर निर्भर होते रहते हैं जैसे-बैक्ट्रिया, कवक आदि सूक्ष्मजीव। ये प्राणी मृतकों को अपघटित करके उन्हें सरल पदार्थो में परिवर्तित कर देते हैं। अपघटकों की इस प्रक्रिया को अपघटन ही कहा जाता है। यह खाद्य श्रृंखला क्षय होते प्राणियों तथा पादप शरीर के मृत जैविक पदार्थों से आरम्भ होकर सूक्ष्मजीवों में और सूक्ष्मजीवों से अपरद खाने वाले जीवों एवं अन्य परभक्षियों में पहुँचती है।

जैसे – कचरा → स्प्रिंगटेल (कीट) → छोटी मकड़ियाँ (मांसभक्षी)

ध्यान देने वाली बात यह है कि पौधों एवं जानवरों के मध्य एवं जानवरों तथा जानवरों के मध्य का अंतर-संबंध ऊर्जा उत्पादन तथा खपत के क्षेत्र में खाने और खाए जाने के कई चरणों के एक निश्चित पैटर्न में परिणाम ही खाद्य श्रृंखला के रूप में ही जाना जाता है।अगर कोई भी आवास, रहने योग्य होता है, तो इसमें ऑटोट्रॉफ एवं हेटरोट्रॉफ दोनों ही पूरी तरह से शामिल होते हैं ऑटोट्रॉफ निवास के कच्चे माल पर निर्भर करते हैं तथा हेटरोट्रॉफ ऑटोट्रोफ पर सीधे या फिर परोक्ष रूप से ही निर्भर होते रहते हैं।